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30 साल की वेटिंग के बाद मामू को मिला टिकट, भांजे ने खीच दी चेन

8 वर्ष पहले
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चंडीगढ़. पवन कुमार बंसल ने चंडीगढ़ के स्थानीय नेता से देश के रेल मंत्री तक का सफर तय किया। उनके 36 साल के पॉलिटिकल करियर में छोटे-बड़े स्टेशनों की तरह कई पड़ाव आए।
हर बार बंसल कभी न रुकने वाली ट्रेन की तरह धीरे-धीरे ही सही आगे बढ़ते गए। करियर की ऊंचाई तक पहुंचने में बंसल को तीन दशक लगे थे, लेकिन नीचे आने में महज 7 दिन। शुक्रवार को उन्हें रेल मंत्री के पद से इस्तीफा देना ही पड़ा। यह उनके प्रभावशाली करियर का आखिरी स्टेशन साबित हो सकता है।
195 दिन रेल मंत्री रहे बंसल ने भांजे विजय सिंगला की गिरफ्तारी के 7 दिन बाद इस्तीफा दिया। 3 मई को सिंगला रेलवे में प्रमोशन दिलाने के नाम पर 90 लाख की रिश्वत लेते हुए सीबीआई के हत्थे चढ़े थे। यह विरोधाभास ही है कि राजनीति में बंसल को उनकी क्लीन इमेज और अपने काम में मेहनत से डटे रहने के लिए जाना जाता था। इसी इमेज ने रेल मंत्रालय का तोहफा दिलाया था।
माना गया था कि वह प्रधानमंत्री के विजन को बखूबी अंजाम देंगे और रेल मंत्रालय को क्षेत्रवाद से परे ही रखेंगे। यूपीए सरकार में चार प्रमुख केंद्रीय मंत्रियों में से एक बंसल को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और यूपीए अध्यक्षा सोनिया गांधी का करीबी माना जाता था। इससे वह विपक्ष के साथ ही अपनी ही पार्टी के कई नेताओं के भी निशाने पर थे।