कई पावर प्लांट पड़े हैं बंद

9 वर्ष पहले
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कपिल चड्ढा, चंडीगढ़ ।


प्रदेश में बिजली कटौती ने गर्मियों में तो उपभोक्ताओं को रुलाया ही, सर्दी में भी चैन से जीने नहीं दे रही। राज्य सरकार बिजली की मांग पूरी नहीं कर पा रही है, क्योंकि प्रदेश के अपने बिजली उत्पादन केंद्रों की हालत चिंताजनक बनी हुई है। नतीजन घरेलू से लेकर इंडस्ट्रियल उपभोक्ताओं को घोषित कटौती के साथ अघोषित कटौती की मार भी झेलनी पड़ रही है। हिसार में खेदड़ पावर प्लांट पर 600 मेगावाट और यमुनानगर में 300 मेगावाट का यूनिट बंद पड़ी है। झज्जर में सीएलपी (चाइना लाइट प्वाइंट) में 660 मेगावाट की एक यूनिट बंद चल रही है। एनटीपीसी (नेशनल थर्मल पावर कार्पोरेशन) में 500 मेगावाट की पहली यूनिट भी तकनीकी कारणों से बंद है। इसमें हरियाणा का हिस्सा 50 प्रतिशत बिजली का है। सरकार बिजली कटों का कारण ठंड और धुंध को बता रही है।

पानीपत की चार यूनिट हुई थी बंद

बीते 3 जनवरी को पानीपत थर्मल के आठ में से चार यूनिट एक साथ चलने बंद हो गए थे। इससे राज्य में बिजली का संकट गहरा गया था। संयोग से चारों यूनिट उसी दिन से वापस चलने लगे, लेकिन इनमें उत्पादन अब तक सामान्य नहीं हो पाया है।

सिर्फ केंद्र का सहारा

मंगलवार को हरियाणा में बिजली की मांग 4120 मेगावाट थी, जबकि उपलब्धता 4260 मेगावाट की थी। इसमें राज्य के अपने स्रोतों (दूसरे यूनिटों में शेयर सहित) मात्र 2969 मेगावाट थी। बाकी 1389 मेगावाट बिजली सेंट्रल गवर्नमेंट शेयर खाते से लेकर उपभोक्ताओं की मांग पूरी की गई। ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं को रोजाना 11 घंटे, कृषि उपभोक्ताओं को 8 घंटे, इंडस्ट्री को 20 घंटे और शहरी उपभोक्ताओं को 20 घंटे बिजली दी जा रही है।

राजस्व जुटाने पर जोर, सप्लाई देने पर नहीं


हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स व इंडस्ट्री के स्टेट लीगल एडवाइजर विनोद खंडेलवाल के अनुसार सरकार उपभोक्ताओं से राजस्व जुटाने पर जितना जोर दे रही है, उतना बिजली सप्लाई सुधारने पर नहीं दे रही। पानीपत में पिछले पांच महीनों से रोजाना घंटों कट लग रहे हैं। वहीं उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के निदेशक डीके महेश्वरी ने कहा कि मौसम की वजह से राज्य में बिजली की सप्लाई डिस्टर्ब हुई है। खेदड़ व पानीपत के पावर प्लांट पर बिजली का उत्पादन फॉग की मार के चलते बीते दो-तीन दिन से प्रभावित हुआ है। बिजली सप्लाई जल्द सामान्य हो जाएगी।