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प्रोफेसर पैम राजपूत बोलीं- 'मैं नहीं मानती पीयू में हैरासमेंट नहीं होती'

8 वर्ष पहले
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चंडीगढ़. 'पंजाब यूनिवर्सिटी में सेक्सुअल हैरासमेंट नहीं होती, ये मैं नहीं मानती। केसेज सामने नहीं आते। क्योंकि हमने ऐसा माहौल नहीं दिया है।' यह तीखे कमेंट थे प्रो. पैम राजपूत के। प्रो. राजपूत गवर्नमेंट ऑफ इंडिया की हाईपावर कमेटी ऑन वुमन इम्पावरमेंट की चेयरपर्सन हैं। वह बुधवार को पीयू में सेंटर फॉर वुमन स्टडीज एंड डेवलपमेंट की ओर से कराए गए सेमिनार में बोल रही थीं। सेमिनार का टॉपिक था- वुमन एंड वॉयलेंस: लेसन लन्र्ट एंड फ्यूचर स्ट्रेटजीज। उन्होंने कहा- सेमिनार महत्वपूर्ण हैं, लेकिन ये सिर्फ सिफारिशें बन कर ना रह जाएं, हम अपने एक्शन से इस विचार-चर्चा का कोई नतीजा सामने लाएं। नेशनल वुमन कमीशन की चेयरपर्सन ममता शर्मा नहीं पहुंचीं।

सेक्सुअल हैरासमेंट का अर्थ समझाएं

रजिस्ट्रार प्रो. एके भंडारी का नाम लेते हुए कहा कि पीयू अपनी सेक्सुअल हैरासमेंट कमेटी को मजबूत करें। इसके मेंबर्स की जानकारी पीयू के प्रॉस्पेक्टस और इंस्ट्रक्शन बुक्स में दी जाए, ताकि ये बहाना ना रहे कि नोटिस बोर्ड पर लगाया था किसी ने हटा दिया। मेल-फीमेल नॉन टीचिंग स्टाफ के लिए विशेष कार्यक्रम के जरिए सेक्सुअल हैरासमेंट का अर्थ समझाने और इसके कानूनी नुक्ते बताने को कहा।

डीसीडीसी प्रो. नवल किशोर को उन्होंने पीयू से एफिलिएटेड सभी कॉलेजेस में सेक्सुअल हैरासमेंट कमेटियों का गठन करने और विशाखा गाइडलाइंस के अनुसार हर साल इन कमेटियों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट तलब करने को कहा।

पुटा के पूर्व प्रेसिडेंट प्रो. मोहम्मद खालिद से कहा कि जब भी पीयू या कॉलेजेस में सेक्सुअल हैरासमेंट का कोई मामला आता है तो उसे टीचर वर्सेज स्टूडेंट का रंग ना दें। उन्होंने सुरक्षा को मानवाधिकार बताते हुए लड़कियों की बात उसी एंगल से सुनने की बात कही।

प्रो. राजपूत ने मीडिया पर भी कमेंट किया। उन्होंने कहा कि प्रिंट और इलेक्ट्रिनिक मीडिया में महिलाओं पर हो रहे अत्याचार की खबरें लिखी जाती हैं और प्रसारित भी की जाती हैं। लेकिन उनके विज्ञापनों में महिलाओं के लिए वह संवेदना कहीं भी नजर नहीं आती।

यूथ के लिए भी सवाल छोड़ गईं राजपूत

प्रो. राजपूत का आखिरी सुझाव यंग टीचर्स और स्टूडेंट्स को था। उन्होंने कहा कि लेक पर कम कपड़ों में धूप सेकना आपका निजी मामला हो सकता है। लेकिन मार्केट ड्रिवेन फोर्सेज के कारण छोटे और बदन दिखाने वाले कपड़े पहनने से पहले एक बार सोचें कि क्या आप अपनी मर्जी से ऐसा कर रहे हैं या बाजार आपको चला रहा है। प्रोफेसर पैम राजपूत की ये नसीहत लड़कों के लिए भी थी।