चंडीगढ़। प्रॉपर्टी टैक्स को सरल करते हुए सरकार अब इसे कलेक्टर रेट से अलग करेगी। शहरों को तीन जोन में बांटकर प्रॉपर्टी के हिसाब से टैक्स लिया जाएगा। बड़े नगर निगमों और नगर पालिकाओं में दरें अलग-अलग होंगी। कमर्शियल प्रॉपर्टी पर प्रति वर्गफुट के हिसाब से और रेजिडेंशियल पर प्रतिवर्ग गज के हिसाब से दरें वसूली जाएंगी। हालांकि, अंतिम मुहर मंगलवार को होने वाली कैबिनेट मीटिंग में लगेगी।
प्राॅपर्टी टैक्स का जो नया फार्मूला बना है वह काफी सरल है। बड़े नगर निगमों जिनमें लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, पटियाला और बठिंडा समेत सभी शहरों में तीन जोन बनेंगे। ए-जोन में पॉश इलाका, बी-जोन में मीडियम दर्जा का एरिया और सी-जोन में शहर के आउट एरिया होंगे। अब हाउस टैक्स की बजाय प्राॅपर्टी टैक्स ही देना होगा।
जोन के हिसाब से होंगी दरें
ए, बी, सी जोन में आने वाले रेजिडेंशियल क्षेत्र पर क्रमश: 5 रुपए, 4 रुपए और 3 रुपए प्रति वर्ग गज रेट होगा। जबकि कमर्शियल एरिया में यही रेट प्रति फुट के हिसाब से होंगे। ए व बी क्लास की नगर पालिकाओं में यह रेट रेजिडेंशियल में 4 रुपए, 3 रुपए और 2 रुपए प्रति गज होगा और कमर्शियल में यही प्रति फुट के हिसाब से देना होगा। सी क्लास की नगर पालिकाओं में 3 रुपए, 2 रुपए और 1 रुपया प्रति गज और प्रति फुट रेट होंगे। ऊपर की मंजिलों में रेट उसी अनुपात में घट जाएंगे।
ऐसे समझें
> यदि आपकी 200 वर्ग गज की रेजिडेंशियल प्राॅपर्टी निगम के पॉश एरिया में है तो उसे 5 रुपए प्रतिवर्ग गज के हिसाब से एक हजार रुपए सालाना प्राॅपर्टी टैक्स देना होगा।
> बी जोन यानी मीडियम इलाके में 200 वर्ग गज की रेजिडेंशियल प्राॅपर्टी है तो आपको 4 रुपए प्रतिवर्ग गज 800 रुपए सालाना प्राॅपर्टी टैक्स देना होगा।
> अगर इतनी प्रॉपर्टी सी जोन यानी आउटर एरिया में है तो 600 रुपए के हिसाब से टैक्स देना होगा।
इन पर भी लगेगी मुहर
> नगर निगमों और पालिकाओं में बिना मंजूरी के विज्ञापन लगाने पर अब 5000 रुपए जुर्माना होगा।
> हाउसिंग विभाग अवैध कालोनियों को रेगुलर करने संबंधी नीति में बदलाव के लिए एजेंडा ला रहा है।
> खेतीबाड़ी विभाग नई भर्ती संबंधी एजेंडा लाएगा जबकि नाबार्ड के अधीन नई लाइब्रेरी बनाने को भी मंगलवार को मंजूरी दी जाएगी।
> गांवों में लगने वाले पशु मेलों में अब हाथी नहीं बिकेंगे। केंद्र सरकार के निर्देशों पर पशुओं को बेचने वाली सूची से हाथी को हटाया जा रहा है।
तो क्या रातभर पढ़ेंगे एजेंडा..
संसदीय चुनाव में अकाली-भाजपा की हार का सबसे बड़ा कारण बने प्रॅापर्टी टैक्स पर एक बार फिर पूरी कैबिनेट एडहॉक रवैया ही अपनाएगी। क्योंकि रूल्स ऑफ बिजनेस के उलट सभी मंत्रियों को कैबिनेट का एजेंडा रात को आठ बजे के बाद ही मिला और सुबह 9.30 बजे कैबिनेट की मीटिंग होगी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सभी मंत्री पूरी रात बैठकर प्राॅपर्टी टैक्स की दरों और मेडिसिटी में बड़े अस्पतालों को दी जाने वाली जमीन की पॉलिसी को स्टडी करेंगे या फिर बिना पढ़े ही सीएम प्रकाश सिंह बादल के कहने पर इसे पास कर देंगे। यह सवाल मंत्रियों को केवल कुछ घंटे पहले कैबिनेट का एजेंडा देने से पैदा हुआ है।
इधर, कैबिनेट ब्रांच के एक सीनियर अफसर ने बताया, रूल्स ऑफ बिजनेस में तीन दिन पहले कैबिनेट का एजेंडा भेजने का प्रावधान है, लेकिन ऐसा नहीं हो पाता। पहले तो मंत्री ही अंतिम समय तक एजेंडा ब्रांच को नहीं भेजते। यदि भेज देते हैं तो चीफ सेक्रेटरी और सीएम आफिस से क्लियर होकर नहीं आता। ऐसे में हमारे पास ऐन मौके पर ही एजेंडा भेजने का विकल्प बचता है।