पंचकूला. सुबह के 10 बजे हैं। पंचकूला के डीसी ऑफिस के बाहर पुलिसवाले लाइन में खड़े हैं और हर आने-जाने वाले को सैल्यूट ठोक रहे हैं। इनमें 6 कॉन्स्टेबल और दो सब इंस्पेक्टर हैं। एंट्रेंस गेट पर चार-चार पुलिसकर्मी दो लाइनों में ये ड्यूटी दे रहे थे। पता चला कि इन्होंने अपनी ड्यूटी सही से नहीं निभाई। इसलिए सीनियर अफसरों ने इन्हें यहां खड़ा होकर सैल्यूट ठोकने की सजा दी है। हालांकि इस मामले में एसीपी जगतार सिंह ने कहा कि यह कोई बड़ी बात नहीं है। यह डिपार्टमेंटल इश्यू है। डिपार्टमेंट ऑफिसर्स की ओर से कुछ चीजों को देखते हुए ही यह कार्रवाई की गई होगी।
ड्यूटी से गायब मिले थे पुलिसकर्मी
मौके पर चर्चा थी कि ड्यूटी में कोताही बरते जाने को लेकर ही आठ पुलिसकर्मियों को सजा दी गई है। पता चला कि इन सभी पुलिसकर्मियों की ड्यूटी नाके व पीसीआर पर लगती है, लेकिन जब चेकिंग की गई तो इन आठों में से कोई मौजूद नहीं था। इसमें डिपार्टमेंट के अफसरों ने 7 घंटे के लिए यह सजा मुकर्रर की थी।
सुबह 10 से लेकर 5 बजे तक खड़े रहे
गेट के बाहर सभी पुलिसकर्मी सुबह 10 बजे ही खड़े हो गए थे। हर आने-जाने वाले को शाम 5 बजे तक सैल्यूट ठोके जाते रहे। इसी बीच यदि इन पुलिसकर्मियों का कोई जानकार आता तो ये अपना मुंह भी छिपाते रहे। बीच-बीच में वे इधर-उधर खिसक भी लेते और फिर थोड़ी देर में अपनी जगह पर आकर खड़े हो जाते।
सजा देने वाले पर हो सकती है कार्रवाई
छोटी सी गलती पर जवानों को जो सजा दी है, वह बिल्कुल गलत है। यह तो पुलिस एक्ट में कॉर्पोरल पनिमशमेंट की श्रेणी में आता है। एक्ट के तहत इस तरह की सजा नहीं दी जा सकती। अफसर चाहे तो जवान को सेन्श्योर कर सकते हैं, वाॅर्निंग दे सकते हैं। डिपार्टमेंटल इंक्वायरी की जा सकती है। अपराध ज्यादा है तो डिसमिस कर सकते हैं। लेकिन इस तरह की सजा देने वाले अफसर के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। - हरीश भारद्वाज, एडवोकेट
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