दुश्मन की नापाक हरकत के बाद पंजाब सीमा पर हाई अलर्ट, चप्पे-चप्पे पर डटे जवान

9 वर्ष पहले
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जम्मू-कश्मीर में भारतीय सीमा में घुसपैठ कर दो जवानों के सिर काट देने की पाकिस्तान की कायराना हरकत के बाद पंजाब की सीमाएं हाईअलर्ट पर हैं।
कंपकंपाती ठंड में पंजाब की 517 किलोमीटर लंबी सरहद की सुरक्षा का जिम्मा सीमा सुरक्षा बल पर है। बुधवार को भास्कर टीम ने सरहद पर हालात का जायजा लिया। देखा कि हमारे देश के रखवाले किन हालात में डटे हुए हैं जिनकी वजह से हम देशवासी सुरक्षित हैं। अमृतसर से शिवराज द्रुपद, गुरदासपुर से शिवेश दत्त, फाजिल्का से लक्षमण दोस्त की रिपोर्ट-
ठंड में डटे देश के पहरेदार
इंडो-पाक बॉर्डर फाजिल्का - भीषण ठंड के बावजूद जवान पूरी तरह से मुस्तैद हैं। दुश्मन की हर हरकत पर नजर रखी जा रही है। ग्रामीणों में जरूर खौफ देखा जा रहा है। वजह ये है कि कारगिल युद्ध के समय उन्हें नुकसान हुआ था।
पाक की हर हरकत पर निगाह रखने के लिए बीएसएफ की ओर से नफरी को और तेज कर दिया गया है। जवान पूरी चौकसी के साथ डटे हुए हैं। मौसम खराब होने के बावजूद मुस्तैदी में किसी तरह की कोई कमी नहीं है। हालांकि पूरे घटनाक्रम के बाद से सरहद के पास स्थित गांवों के लोग जरूर भयभीत हैं। कारगिल युद्ध के दौरान भी यहीं के ग्रामीणों को ज्यादा नुकसान हुआ था। उस समय सरहदी ग्रामीण गांव छोड़कर अन्य सुरक्षित स्थानों पर चले गए थे।
सरहद के निकट माइंस बिछा दी गई थीं, जिनके निकाले जाने के बाद वे घरों में वापस लौट सके थे। कमांडेंट दीपक कंडवाल ने बताया कि हमारे जवान पूरी तरह से हर हालात से निपटने को तैयार हैं। रात के समय विशेष चौकसी के लिए इन्हें हर सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
धोखेबाज पर पूरी निगाह
इंडो-पाक बॉर्डर गुरदासपुर - सीमा पर तैनात 5 बटालियन के जवान चप्पे-चप्पे पर नजर रख रहे हैं। वर्ष 2008 में भर्ती की गईं महिला जवान भी दिन के समय कर रहीं चौकसी। रावी नदी के पास वाले क्षेत्र में बरती जा रही विशेष सतर्कता।
सीमा पर गश्त का नजारा बुधवार को आम दिनों की अपेक्षा अलग था। टोलियों में जवान एक-दूसरे के पीछे चल रहे थे। उनकी नजरें दुश्मन देश की तरफ कंट्रोल लाइन पर थीं। फेंसिंग की तारों पर उनकी नजर थी। कहीं पर कोई तार से छेड़छाड़ न हो जाए। कलानौर से सटे सीमावर्ती गांव सिंबल, सकोर, आदिया, दोस्तपुर, सहूर, सठियाल और रोसा चेकपोस्ट पर जवान मुस्तैदी से सीमा पर नजर रखे हुए थे। गांव सिंबल के पास का इलाका सुरक्षा के नजरिए से ज्यादा महत्वपूर्ण है। वजह यह है कि यहीं से होकर पाकिस्तान से रावी नदी भारतीय सीमा में प्रवेश करती है।
यहां तो जर्जर है फेंसिंग
इंडो-पाक बॉर्डर- अमृतसर - मौसम सितम ढा रहा है। व्यवस्था भी दुरुस्त नहीं है। फिर भी जर्जर फेंसिंग की रखवाली के लिए जवान पूरी तरह से जज्बे के साथ डटे हुए हैं। दुश्मन की एक-एक हरकत पर पूरी तरह से नजर रखी जा रही है।
इंडो-पाक बॉर्डर, हड्डियों तक को हिला देने वाली सर्दी, शीत लहर और कोहरे का कोहराम। शाम होने के बाद दूर-दूर तक कुछ भी नजर नहीं आता। सरहद पार से होने वाली घुसपैठ और तस्करी को रोकने के लिए लगाई गई कटीली फेंसिंग पुरानी पड़ चुकी है। फ्लड लाइटें भी असरदार नहीं हैं।
व्यवस्था के नकारेपन की जवाबदेही अब बीएसएफ के जवानों पर आ गई है। पाक की तरफ से होने वाली आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए 1989 में पाक से लगती सरहद की बाड़बंदी की गई थी। श्री गंगानगर से लेकर गुरदासपुर तक 545 किलोमीटर के कुछ किलोमीटर को छोड़ करके समूची सरहद को इसके तहत लाया गया था।
सरहदी जिलों अमृतसर, गुरदासपुर, तरनतारन और फिरोजपुर की फेंसिंग बेहद ही पुख्ता बनी थी। इसमें बिजली का प्रवाह भी होता है। फ्लड लाइटें भी लगाई थीं। फेंसिंग का मेंटेनेंस न होने से जंग लग चुकी है। कंसरटीन क्वायल लगाकर काम चलाया जा रहा है। रेस्ट करने के लिए पटरों और तिरपालों की कमी को झाड़ियों और सरकंडों से पूरा करना पड़ रहा है। महिला जवानों के लिए बेहतर व्यवस्था नहीं है।
स्थिति का जायजा बीएसएफ के डायरेक्टर जनरल ने लिया है। इस प्रोजेक्ट पर पीडब्ल्यूडी जल्द काम करने वाली है। फिर भी हमारी फोर्स सुरक्षा को बेहतर तरीके से अंजाम देने के लिए कटिबद्ध है।
आदित्य मिश्रा, इंस्पेक्टर जनरल बीएसएफ, पंजाब फ्रंटियर।
यूएन में उठाएं आवाज
पाकिस्तान की मानसिकता कुत्सित हो चुकी है। 1999 में कारगिल की जंग में हमारे जवान सौरभ कालिया के शरीर के साथ ऐसा ही अमानवीय बर्ताव किया गया था। भारत मामले को गंभीरता से ले। 1962 में चीन, 1965 में पाकिस्तान और 1971 में बांग्लादेश की आजादी में अहम किरदार निभाने वाले सिंह ने कहा कि भारत यूएन में इस मुद्दे को उठाए। हालांकि आज नहीं तो कल पाकिस्तान कहेगा इसमें आतंकवादियों का हाथ है।
रिटायर्ड मेजर जनरल डीडी सिंह