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3 साल से एससी छात्राओं को नहीं मिलीं फ्री किताबें, पंजाब सरकार पर भेदभाव का आरोप

8 वर्ष पहले
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चंडीगढ़. 12वीं क्लास के लगभग एक लाख विद्यार्थी टेबलेट का इंतजार करते-करते पास आउट कर गए और अब 11वीं के लगभग इतने ही विद्यार्थी इंतजार कर रहे हैं।
यदि इन्हें टेबलेट न भी मिला तो भी इनकी मूल पढ़ाई में शायद फर्क न पड़े लेकिन पिछले तीन साल से लगभग तीन लाख अनुसूचित जाति की बच्चियां निशुल्क किताबों का इंतजार कर रही हैं।
हर साल बजट में इसका प्रावधान करने के बावजूद राज्य सरकार ने पिछले तीन सालों में एक फूटी कौड़ी भी नहीं दी। यह जानकारी समाज कल्याण विभाग के मंत्री गुलजार सिंह रणिके की ओर से कांग्रेस के विधायक त्रिलोचन सिंह द्वारा बजट सत्र के दौरान पूछे गए प्रश्न के जवाब में दी गई।
कमाल की बात यह है कि सरकार को परेशानी से बचाने के लिए विधानसभा ने यह प्रश्न अनस्टार्ड में लगवा दिया। ताकि, संबंधित विधायक को इस पर अनुपूरक प्रश्न पूछकर सरकार या मंत्री को ग्रिल करने का मौका न मिले।
सरकार की है चाल: त्रिलोचन
विधायक त्रिलोचन सिंह कहते हैं, अच्छा हुआ यह बात अखबारों में नहीं आई कि अनुसूचित जाति की बच्चियों को निशुल्क किताबें देने की कोई योजना भी है, नहीं तो ये बेचारी किताबों की प्रतीक्षा करते करते ही फेल हो जातीं।
त्रिलोचन सिंह का आरोप है, यह सरकार की मजदूर पैदा करने की सोची समझी साजिश है। इससे पहले मैंने अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को वजीफा देने का प्रश्न भी पूछा था, उसमें भी आया कि किसी को वजीफा नहीं मिला जबकि इसके लिए पिछले दो सालों में 109 करोड़ रुपए रखे गए थे।
अकाली-भाजपा सरकार जानती है कि सरकारी स्कूलों में अब केवल अनुसूचित जातियों के गरीब बच्चे ही पढ़ते हैं। इसलिए न तो उन्हें किताबें दो और न ही उनके बच्चों को फेल करो, इससे उनके पास मजदूरी करने के अलावा और कोई विकल्प ही नहीं रहेगा। अगर ये पढ़ लिख गए तो इन्हें अपने हकों का पता चल जाएगा।
किस साल में कितना फंड रखा और कितना खर्च किया
2010-11 100 लाख कुछ भी नहीं
2011-12 80 लाख कुछ भी नहीं
2012-13 80 लाख कुछ भी नहीं
स्पेशल ग्रांट भी नहीं मिल रही बच्चों को
इसके अलावा इन बच्चियों को स्पेशल ग्रांट भी मिलती है हालांकि यह मात्र 50 रुपए महीना भर होती है लेकिन यह भी उन्हें पूरी नहीं मिल रही है। साल 2010-11 में इसके लिए 40 लाख रुपए रखे गए लेकिन 36.62 लाख रुपए ही खर्च किए। साल 2011-12 में 24.38 लाख का प्रावधान किया गया जिसमें 14.22 लाख रुपए खर्च हो सके। साल 2012-13 में इसके लिए पैसा ही नहीं रखा गया।
इधर, मंत्री जी चुनाव में व्यस्त हैं
इस समय मैं ब्लॉक समिति के चुनाव में व्यस्त हूं। पिछले एक सप्ताह से मेरी अमृतसर में ड्यूटी लगी हुई है। एक-दो दिन में चंडीगढ़ आकर इसका पता करूंगा कि आखिर क्यों तीन साल से किताबों के लिए पैसा नहीं मिल रहा है और स्पेशल ग्रांट खर्च क्यों नहीं हो पा रही है।
-गुलजार सिंह रणिके, समाज कल्याण मंत्री, पंजाब