चंडीगढ़. प्रदेश सरकार का नारा नंबर-वन हरियाणा का है। लेकिन विपक्ष विकास में भेदभाव के मुद्दे को जोर शोर से उठाता रहा है। भास्कर सर्वे में करीब 20 प्रतिशत की नजर में यही सबसे प्रमुख मुद्दा रहेगा। सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो विकास कार्यों पर सबसे ज्यादा पैसा रोहतक व झज्जर में खर्च हुआ। तीसरे नंबर पर
सोनीपत जिला है। पंचकूला और पलवल ऐसे जिले हैं जिनमें विकास कार्यों पर सबसे कम पैसा खर्च किया गया है।
आरोप लगाकर कई छोड़ गए पार्टी
राज्यसभा सदस्य रहे चौधरी बीरेंद्र सिंह, फरीदाबाद के पूर्व सांसद अवतार सिंह भड़ाना, करनाल के पूर्व सांसद अरविंद शर्मा, अम्बाला के विधायक विनोद शर्मा, राज्यसभा सदस्य कुमारी सैलजा, गुड़गांव के सांसद राव इंद्रजीत, सिंचाई मंत्री कैप्टन अजय यादव समेत कई नेताओं ने विकास में भेदभाव के आरोप लगाए। इनमें से कई लोग तो इसी मुद्दे पर कांग्रेस छोड़ चुके हैं। हालांकि मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और पार्टी हाईकमान इन आरोपों को खारिज करता रहा।
भेदभाव नहीं, स्वार्थी नेता दे रहे ऐसे बयान: सीएम
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा विकास में भेदभाव के आरोपों को शुरू से ही नकारते रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने पूरे प्रदेश में समान रूप से विकास करवाया है। किसी भी जिले या क्षेत्र के विकास की तुलना पिछली गैर कांग्रेसी सरकार के कार्यकाल से की जानी चाहिए। जो लोग विकास में भेदभाव के आरोप लगा रहे हैं, उनमें से कई नेता तो सार्वजनिक बयान भी दे चुके हैं कि उनके क्षेत्र में जितना विकास हमने करवाया है, उतना आज तक किसी ने नहीं करवाया। भेदभाव के आरोप लगाने वालों के पास कोई मुद्दा नहीं है और वे निजी स्वार्थों के कारण ऐसे आरोप लगा रहे हैं।
प्रभारी को नहीं मिले डाटा
प्रदेश प्रभारी शकील अहमद को भी प्रदेश में हुए विकास कार्यों पर खर्च राशि के आंकड़े न तो सरकार ने उपलब्ध कराए और न ही विरोधी गुट दे पाया। उन्होंने विरोधियों को चुनौती दी थी कि अगर कहीं भेदभाव हुआ है तो वे आंकड़े देकर साबित करें।
रोहतक-झज्जर जिले का विकास खर्च क्यों नहीं रखा?
सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के समान विकास के दावों को सही ठहराने के लिए हरियाणा सरकार ने 21 में से 19 जिलों के विज्ञापन जारी किए। इनमें पिछले साढ़े नौ साल के विकास संबंधी आंकड़ों को जोरशोर से प्रचारित किया गया। लेकिन रोहतक और झज्जर जिलों के विकास पर हुए खर्च को सार्वजनिक नहीं किया गया। दैनिक भास्कर ने करीब एक पखवाड़े से ज्यादा समय तक सरकार से इन जिलों में विकास कार्यों पर हुए खर्चे के आंकड़े मांगे, लेकिन सीएमओ और सरकारी अफसर देने को तैयार नहीं हुए। इन जिलों के विकास संबंधी खर्चों के आंकड़े बमुश्किल हासिल किए गए।
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