चंडीगढ़. मौजूदा वक्त में सिखों ने भले ही कनाडा में अपनी मजबूत पहचान बना ली है, मगर सन 1905 से 1908 के बीच यहां से कनाडा गए 5 हजार भारतीयों से वहां के गोरों के मन में डर समा गया। उन्हें लगा कहीं भारतीय उनका काम न छीन लें।
इसीलिए इमीग्रेशन रूल्स बेहद सख्त कर दो सौ डॉलर और रास्ते में बिना रुके कनाडा तक की सीधी यात्रा की शर्त रख दी गई। न वे अपनी पत्नी को साथ ले जा सकते थे, न 18 साल के कम उम्र को कोई सदस्य।
वीरवार को ग्रे हाउंड इंफोर्मेशन सर्विसेज कनाडा से पंजाब यूनिवर्सिटी में आए डॉ.डेविड आर ग्रे ने डॉक्युमेंट्री फिल्म ‘डिस इमीग्रेशन’ के जरिए सिखों के माइग्रेशन और उनकी तत्कालीन परेशानियां दिखाने की कोशिश की। कैनेडियन कैंसुअल जनरल स्कॉट स्लेसर ने ग्रे हाउंड इंफॉर्मेशन सर्विसेज और आईसीएसएसआर से कराए गए इस लेक्चर की अध्यक्षता की। आईसीएसएसआर की ऑनरेरी डायरेक्टर प्रो सुरिंदर कलेर शुक्ला भी मौजूद थीं।
हिन्दू के तौर पर थी हर भारतीय की पहचान
‘डिस इमिग्रेशन’ के जरिए डॉ.ग्रे ने बताया कि उन दिनों भारत से गए हर शख्स को हिन्दू ही कहा जाता था। वहां हिन्दू टाउन था। पंजाबियों में अधिकांश सिख थे और कहीं ज्यादा मेहनती थे। इमिग्रेशन रूल्स सख्त किए जाने के बाद कामागाटामारू जहाज की घटना हुई।
डॉक्युमेंट्री में ऐसे कई लोगों को दिखाया, जिनके परिवारों में पुरुषों ने दोबारा अपनी पत्नी या मां को देखा ही नहीं। उस समय भारतीय तरीके से अंतिम संस्कार की इजाजत नहीं मिलती थी। सभी को दफनाया जाता था। उस दौरान हर भारतीय को 200 डॉलर, चाइनीज को 500 डॉलर और जैपनीज अधिकतम 400 लोग ही जा सकते थे।
क्या है कामागाटा मारू
23 मई 19 14 को कामागाटा मारू नाम का जापानी शिप 376 भारतीयों (340 सिख, 24 मुस्लिम और 12 हिन्दू) को लेकर वैंकूवर, कनाडा पहुंचा। मगर वहां की तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने उन्हें उतरने की इजाजत देने से इनकार करते हुए लौटा दिया। भारतीयों को लेकर यह शिप 26 सितंबर 1914 को कलकत्ता (अब कोलकाता) पहुंचा।
यहां इसके यात्रियों को बंदी के तौर पर इकट्ठा कर सभी पंजाब भेजने की तैयारी की गई। मगर यात्रियों ने विरोध करते हुए कलकत्ता में ही कामकाज या कारोबार की इजाजत चाही। मगर तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने उन्हें जबरन भेजने की कोशिश की। नाराज लोगों ने शहर में विरोध मार्च निकालना शुरू किया। इस बीच उनकी पुलिस से झड़प हुई और गोलीबारी में करीब 20 यात्री मारे गए, कई अन्य घायल हो गए।
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