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डाउनलोड करेंचंडीगढ़।बार बार अपने बेगुनाही की दुहाई देकर एसएसपी के स्टाफ ऑफिसर (एसओ) बनने और सस्पेंशन से बहाल होने वाले एसआई संजीव कुमार की दलीलों को सुप्रीम कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया है। अपने खिलाफ भ्रष्टाचार के एक केस में एसआई संजीव कुमार ने सीबीआई की सीडी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे और खुद को झूठा फंसाने की दलील के साथ सुप्रीम कोर्ट चले गए थे।
गत वर्ष संजीव कुमार ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में भी याचिका दायर कर सीडी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए केस खारिज करने की मांग की थी। लेकिन हाईकोर्ट से उन्हें राहत नहीं मिली थी। दिसंबर 2012 में संजीव सुप्रीम कोर्ट गए और 26 अप्रैल 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया। बुधवार को सीबीआई विशेष अदालत में सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर की प्रति सौंपी गई। मामले में आरोप तय करने को लेकर बहस के लिए 30 मई की तारीख तय की गई है।
क्या था मामला
दायर मामला 7 नवंबर 2008 का है। सेक्टर 17 स्थित आनंद मार्केट में पांडे बुक हाउस पर मारपीट और दुकान पर कब्जा करने के मामले में थाना सेक्टर-17 पुलिस जांच कर रही थी। सीबीआई ने तत्कालीन नीलम चौकी इंचार्ज एसआई संजीव और ज्वेलर सुभाष कटारिया को इस केस को दबाने के लिए 50 हजार रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। दुकान में तोडफ़ोड़ करने के मामले में पांडे बुक हाउस के मालिक अरविंद पांडे ने सेक्टर 17 में शिकायत दी थी।
इसके साथ ही पांडे ने आरोप लगाया था कि 26 दिसंबर 2008 को वह सेक्टर-17 स्थित एएसपी मधुर वर्मा के दफ्तर में मामले की जानकारी लेने गए थे। पांडे के आरोप के मुताबिक तत्कालीन एएसपी मधुर वर्मा ने उन्हें अपने कमरे में बुलाकर पूछा था कि पहले रिकॉर्डिंग कैसे की और उलाहना दिया कि क्या इस बार भी रिकॉर्डिंग करने आया है। पांडे ने आरोप लगाया था मधुर वर्मा ने अपने तीन गनमैन बुलाकर उन्हें पिटवाया था।
30 मई को आरोप तय करने पर होगी बहस
देश की शीर्ष अदालत से भी राहत न मिलने के बाद एसआई संजीव कुमार, सुभाष कटारिया और एसआई रमेश के खिलाफ चंडीगढ़ की सीबीआई विशेष अदालत में आरोप तय होने को लेकर 30 मई को बहस होगी। शिकायतकर्ता अरविंद पांडे का कहना है कि उन्होंने नए आईजी आरपी उपाध्याय को एसआई संजीव कुमार को एसएसपी नौनिहाल सिंह के संरक्षण से हटाने की मांग की है।
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