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पंजाब में खुलेगी स्पेशल एजुकेशन यूनिवर्सिटी, अगले साल से होगी शुरू

7 वर्ष पहले
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चंडीगढ़. मेंटली रिटार्टेड, गूंगे-बहरों, दृष्टिहीनों यानी स्पेशल एजुकेशन की जरूरत वाले बच्चों की ट्रेनिंग और उनकी देखभाल के लिए प्रोफेशनल्स तैयार करने के लिए पंजाब में एक स्पेशल यूनिवर्सिटी अगले साल से शुरू होगी। यह पटियाला के आसपास बनेगी। यह देश में पहली यूनिवर्सिटी होगी, जहां स्पेशल एजुकेटर्स तैयार किए जाएंगे। इंडस्ट्रियलिस्ट अौर सोशल वर्कर दुबई निवासी होटल कारोबारी एस.पी. सिंह ओबरॉय ने यह यूनिवर्सिटी को खोलने का बीड़ा उठाया है। भास्कर से विशेष बातचीत में ओबरॉय ने यह जानकारी दी। 
 
ऐसी होगी यूनिवर्सिटी 
- यूनिवर्सिटी में एक तरफ बच्चों को स्पेशल एजुकेशन देने वाले प्रोफेशनल्स तैयार किए जाएंगे, वहीं बड़ी संख्या में रोजगार भी मिलेगा।
- स्पेशल एजुकेटर्स को तैयार करने के लिए देश-विदेश से प्रोफेशनल्स को जोड़ा जाएगा। यूरोप और अमेरिका में प्रोफेशनल इंस्टीट्यूट से कंसल्टेंसी ली जाएगी।
- पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर हाईटेक होगा और एजुकेटर्स भी विश्वस्तरीय होंगे। यूनिवर्सिटी में 9-10 तरह की स्पेशल एजुकेशन देने के लिए स्पेशल एजुकेटर्स तैयार किए जाएंगे और उन्हें सबसे पहले अपने ही अनाथालयों और स्पेशल एजुकेशन सेंटर्स पर नियुक्त किया जाएगा। 
 
 
ये है सरबत दा भला फाउंडेशन
 
1300 बच्चों को अपनाया
ओबरॉय ने बताया कि पंजाब में वे अब तक 1300 से अधिक बच्चों को अपना चुके हैं और उनकी पढ़ाई का खर्च भी पूरी तरह से उनकी संस्था सरबत दा भला फाउंडेशन ही उठा रही है। वे पंजाब के स्कूलों में लगातार ऐसे बच्चों को खोज रहे हैं जो कि मैरिट में हैं और जरूरतमंद भी। उनकी पढ़ाई का पूरा खर्च हम अदा करेंगे। 
 
2750 विधवाओं को  पेंशन
सरबत दा भला फाउंडेशन पंजाब में 2750 विधवाओं को पेंशन दे रही है। जिला कमेटियों को विधवा पेंशन का आवेदन मिलने के तुरंत बाद टीम स्थिति का पता लगाती  अौर तीसरे दिन ही पेंशन शुरू कर दी जाती है। सरकारी पेंशन पाने वाली महिलाओं को 750 और अन्य को 1000 रुपए की पेंशन दी जाती है। 
 
22 ओल्ड एज होम बनाएंगे
ओबरॉय ने बताया कि पटियाला में 120 बेड्स का ओल्ड एज होम जल्द शुरू हो जाएगा। उसके बाद पंजाब के प्रमुख जिलों में 22 ऐसे ही अोल्ड एज होम बनाए जाएंगे, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता 60-60 बेड्स की होगी। पंजाब में ऐसे बेसहारा सीनियर सिटीजंस की संख्या तेजी से बढ़ी है। उन्हें अब हम सहारा देंगे।