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राज्य नहीं चाहते पेट्रोल-डीजल के एक रेट, जीएसटी पर सहमति नहीं

7 वर्ष पहले
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चंडीगढ़/दिल्ली. राज्य सरकारें नहीं चाहतीं कि जनता को पेट्रोल व डीजल के रेट पूरे देश में एक रेट पर मिले। इसलिए वे इन्हें जीएसटी गुड्स एंड सर्विस टैक्स में पेट्रोल डीजल को शामिल किए जाने का विरोध कर रहे हैं। प्रस्तावित जीएसटी में वैट,सर्विस टैक्स और एक्साइज को खत्म करके इसकी जगह पूरे देश में एक समान टैक्स किए जाने का प्रोविजन है। पंजाब व हरियाणा को सबसे अधिक कमाई पेट्रोल व डीजल पर वैट से हो रही है। पंजाब को तकरीबन 3200 करोड़ और हरियाणा को 2600 करोड़ की कमाई है।
राज्यों को डर है कि जीएसटी में इनके शामिल होने से उन्हें नुकसान अधिक होगा और उसकी भरपाई कम। इसी डर के चलते उन्होंने केंद्र सरकार को झटका देते हुए जीएसटी के ड्राफ्ट को खारिज कर दिया। वीरवार को नई दिल्ली में राज्यों के वित्त मंत्रियों ने एक सुर में कहा कि वे जीएसटी से हाेने वाले नुकसान की भरपाई को लेकर एक हफ्ते के भीतर केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिलेंगे।
परचेज टैक्स के नुकसान की भरपाई चाहते हैं पंजाब-हरियाणा
पंजाब व हरियाणा के वित्त मंत्रियों समेत तमाम राज्यों के वित्त मंत्रियों ने कहा कि जीएसटी के नए ड्राफ्ट में एंट्री टैक्स और पेट्रोल डीजल को बाहर रखा जाए। बता दें यूपीए सरकार ने इसे जीएसटी से बाहर रखा था। राज्य चाहते हैं कि जीएसटी लागू होने पर पांच साल तक केंद्र सरकार उन्हें नुकसान की क्षतिपूर्ति करे।
पंजाब के वित्त मंत्री परमिंद्र सिंह ढींढ़सा ने कहा कि केंद्र अनाज पर परचेज टैक्स से होने वाली 800 करोड़ रुपए की कमाई के नुकसान की भरपाई करे। केंद्र को टैक्स से होने वाली कमाई में 50 फीसदी शेयर राज्यों को देना चाहिए जो वर्तमान में 33 फीसदी है। हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने सुझाव दिया कि अंतरराज्यीय माल एवं सेवा कर (आईजीएसटी) का दो प्रतिशत पहले उन राज्यों को दिया जाए जो माल एवं सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
जीएसटी पर राज्यों के वित्त मंत्रियो की हाईपॉवर्ड कमेटी के अध्यक्ष और जम्मू कश्मीर के वित्त मंत्री अब्दुल रहीम राथर ने राज्यों की ओर से कहा कि फिलहाल जीएसटी पर राज्यों की सहमति नहीं है।