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राज्यपाल कप्तान सिंह ने विदेशों से आए छात्रों को बताया 5-टी फॉर्मूला

7 वर्ष पहले
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चंडीगढ़। 9वें इंटरनेशनल यूथ पीस फेस्टिवल-2014 (आईवाईपीएफ) के तीसरे दिन पीयू के गोल्डन जुबली हॉल में सार्क यूथ लीडरशिप समिट हुई। इसमें चीफ गेस्ट रहे हरियाणा के गवर्नर प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी ने सार्क देशों सहित दुनिया के 30 देशों के करीब 150 डेलिगेट्स को संबोधित किया। डेलीगेट्स के साथ देश के यूथ को उन्होंने 5-टी का फाॅर्मूला समझाया। सोलंकी ने कहा कि 21वीं सदी इंडिया की है। ट्रेड, टैलेंट, टूरिज्म, टेक्नोलॉजी अौर ट्रेडिशन (5-टी) से युवा बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
इससे हर वर्ग पर पॉजिटिव असर पड़ेगा, जो डेवलपमेंट में मददगार होगा। स्वामी विवेकानंद के उपदेशों के बारे में बताते हुए सोलंकी ने कहा कि अगर जिंदगी में उद्देश्य नहीं है, तो जिंदगी जीने का कोई फायदा नहीं। अगर देश में बेरोजगारी न हो तो ड्रग एब्यूज व कई अन्य क्राइम कम हो जाएंगे। सोलंकी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 3डी फॉर्मूला के बारे में बताते हुए कहा कि हमारे देश में डेमोक्रेसी, डेमोग्राफी और डिमांड है इसलिए भारत की तरक्की नहीं रुक सकती। प्रोग्राम में यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम के कंट्री डायरेक्टर जेको सिलियर्स गेस्ट ऑफ ऑनर, राजीव गांधी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ यूथ डेवलपमेंट की डायरेक्टर डॉ. लता पिल्लई और दैनिक भास्कर के स्टेट एडिटर दीपक धीमान भी मौजूद रहे।
ये डेलिगेट्स नहीं हमारे ब्रदर-सिस्टर हैं...
मुझे लगता है कि यह सब डेलिगेट्स नहीं बल्कि मेरे ब्रदर-सिस्टर्स हैं। कुछ इसी अंदाज से गवर्नर कप्तान सिंह सोलंकी ने पोडियम पर आकर स्पीच शुरू की। उन्होंने कहा कि सार्क देशों में सिर्फ 8 देश हैं, लेकिन आज यहां पर 30 देशों के पीस एक्टिविस्ट मौजूद हैं। एनजीओ युवसत्ता को बधाई देते हुए सोलंकी ने कहा कि 9 साल पहले 14 पाकिस्तानी पीस एक्टिविस्ट्स के साथ इस फेस्टिवल की शुरुआत हुई थी जो बढ़कर 30 देशों के 250 डेलिगेट्स तक पहुंच गई है। स्वामी विवेकानंद ने कई साल पहले ही यह भविष्यवाणी की थी कि 21वीं सदी भारत की सदी होगी। वह सपना अब सच होगा।
साउथ एशिया रीजन में गरीबी की दर घटी
यूएनडीपी के जेको सिलियर्स ने समिट के दौरान कई तरह के आंकड़े पेश किए। इनसे पता लगा कि साउथ एशियाई देशों में कुछ सालों में गरीबी की दर घटी है। जेको ने साउथ एशियाई देशों के जो आंकड़े पेश किए वह इस प्रकार हैं-
> 1.25 डॉलर प्रति दिन कमाने वाले गरीब 2012 में 30 परसेंट रह गए हैं।
> प्राइमरी एजुकेशन में एनरोलमेंट की दर 75 परसेंट से बढ़कर 94 परसेंट हो गई है।
> 1990 में प्रति 100 लड़कों पर 74 लड़कियां स्कूल जाती थीं, लेकिन अब लड़कों के बराबर आ गईं।
> पूरी दुनिया में 15 से 24 साल के युवाओं की साक्षरता दर में बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 1990 में यह 83 परसेंट थी लेकिन 2012 में यह 89 परसेंट हो गई।
> पूरी दुनिया में 781 मिलियन एडल्ट्स और 126 मिलियन युवा पढ़ाई से महरूम हैं और इनमें 60 फीसदी महिलाएं हैं।
यह है 5 - टी
> ट्रेड
> टैलेंट
> टूरिज्म
> टेक्नोलॉजी
> ट्रेडिशन
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सभी फोटो- रविदंर भाटिया