मनीमाजरा। शहर के नामी होटल संचालकों द्वारा आईपीआरएस कंपनी के साथ मिलकर डीजे संचालकों को ठगने की शिकायत मनीमाजरा थाने में डीजे, लाइट एंड साउंड एसोसिएशन के सदस्यों ने दर्ज करवाई है। एसोसिएशन द्वारा एक साल पहले भी यह शिकायत मनीमाजरा थाने में दी गई थी। पुलिस ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसी के चलते मंगलवार को एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील कुमार सोनू की अगुवाई में सैकड़ों डीजे संचालकों ने यहां मनीमाजरा थाने में रोष व्यक्त किया।
एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील कुमार सोनू का कहना है कि चंडीगढ़ के डीजे संचालक कॉपीराइट के तहत फोनोग्राफिक परफॉर्मेंस लिमिटेड (पीपीएल) से लाइसेंस लिए हुए हैं। बाकायदा उन्होंने कंपनी को रुपए भी जमा करवा रखे हैं, ताकि वह कॉपीराइट के तहत डीजे बड़े होटलों व अन्य फंक्शंस में चला सकें। लेकिन पिछले कुछ समय से एक अन्य कंपनी आईपीआरएस ने भी उनसे वसूली करनी शुरू कर दी है। इसी को लेकर कई बार कंपनी के अधिकारियों से लाइसेंस मांगा गया। वहीं, सरकार के आदेश की कॉपी भी मांगी गई, लेकिन आज तक इसकी कॉपी नहीं दी गई और जबरदस्ती उनसे वसूली की जाती है।
डीजे संचालकों ने शिकायत में आरोप लगाया गया कि चंडीगढ़ के बड़े होटल्स जेडब्ल्यू मैरियट, होटल ताज व ललित होटल भी इस कंपनी के साथ मिले हुए हैं। यदि किसी ने इन होटल्स में किसी फंक्शन में डीजे चलाना हो तो उससे पीपीएल की फीस के अलावा आईपीआरएस की फीस भी ली जाती है। उन्होंने बताया कि डीजे तो 5 हजार रुपए में बुक होता है, वहीं बड़े होटल में दोनों कंपनियों की ओर से फीस मिलाकर 50 हजार रुपए वसूले जाते हैं। 10 हजार रुपए तो उन्हें होटल में डीजे लगाने के ही देने पड़ते हैं। वहीं, पीपीएल कंपनी अपनी फीस लेती है।
पैसे लेने का अधिकार: कंपनी
आईपीआरएस कंपनी के अधिकारी अरविंद शर्मा ने कहा कि डीजे संचालकों से जितने भी रुपए वसूले जाते हैं, उनकी रसीद दी जाती है। कॉपीराइट के तहत रुपए लेने का अधिकार है। वहीं, कंपनी के नॉर्दर्न रीजन के हेड राकेश सिक्का का कहना है कि डीजे संचालकों से पैसा लेने की उनके पास परमिशन नहीं है, कंपनी द्वारा परमिशन के लिए अप्लाई किया गया है। फिर भी कंपनी रुपए वसूल सकती है। सिक्का का दावा है कि यदि कोई रिकॉर्डेड गाने चलाता है तो उसे पीपीएल व आईपीआरएस दोनों से मंजूरी लेनी जरूरी है।
(फोटो- मनीमाजरा थाने में मंगलवार को शिकायत देने पहुंचे डीजे संचालक।)