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डाउनलोड करेंचंडीगढ़। एजुकेशन डिपार्टमेंट की ओर से 20 साल बाद 187 टीजीटी को प्रोमोशन देकर लेक्चर बनाने के बाद खाली हुई उनकी सीट स्टूडेंट्स के लिए मुसीबत बन गई है। प्रोमोशन देकर ट्रांसफर किए गए टीचर्स की जगह स्टूडेंट्स अब उनके पीरियड में वक्त काटते हैं या फिर उन्हें एडजस्ट कर जैसे तैसे काम चलाया जा रहा है।
यहीं नहीं कुछ स्कूलों में बेहद महत्वपूर्ण विषयों की जिम्मेदारी ट्रेनी टीचर्स के जिम्मे डाल दी गई है। इससे न सिर्फ स्टूडेंट्स को प्रॉपर गाइडेंस मिल पा रहा है, बल्कि उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। नौबत यह है कि शहर के 107 स्कूलों में पहले से करीब 200 टीचर्स की कमी है,
जबकि नए प्रोमोशन के बाद से यह संख्या करीब 400 तक पहुंच गई है।सेक्शन मर्ज कर पढ़ाना और दुश्वार: गवर्नमेंट मॉडल हाईस्कूल-20 से 5 टीचर्स के प्रोमोट किए जाने के बाद इसका असर बच्चों की पढ़ाई पर काफी पड़ रहा है।यह बात स्कूल की टीचर भी दबी जुबान से मानते हैं। उनके मुताबिक टीचर्स की कमी है, इसलिए छठी, सातवीं के दो सेक्शन मर्ज कर किए गए हैं। इनमें 90 से 100 स्टूडेंट्स की जिम्मेदारी सिर्फ एक टीचर के हवाले है। उनके मुताबिक यहां करीब 12 टीजीटी की कमी है।
ज्यादा पीरियड का बर्डन: गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल-19 से 8 टीजीटी प्रोमोट किए गए। यहां के छठी से आठवीं क्लास के स्टूडेंट्स के मुताबिक यहां संस्कृत टीचर नहीं है। इस लिए कभी हिंदी के स्टूडेंट्स के साथ बिठा दिया जाता है तो कभी खाली बैठे रहना पड़ता है।
गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल-16 से 6 टीजीटी प्रोमोट हुए हैं। यहां पहले से ही क्लासें ओवरक्राउड हैं, ऐसे में टीचर्स की एडजस्टमेंट करना मुश्किल हो रहा है। गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-8 डबल शिफ्ट हो चुका है, इसलिए यहां लगभग 8 टीजीटी, 13 जेबीटी की डिमांड है।
महत्वपूर्ण विषय की पढ़ाई ट्रेनी टीचर्स के हवाले
गवर्नमेंट मॉडल हाईस्कूल-20 की नौंवी की स्टूडेंट्स ने बताया कि सोशल स्टडी के पीरियड में सेल्फ स्टडी ही करनी पड़ती है। जो सर पढ़ाते थे उनकी प्रोमोशन के बाद ट्रांसफर हो गई है। दसवीं के स्टूडेंट्स ने बताया कि मैथ्स, साइंस और इंग्लिश के टीचर नहीं है। प्रोमोशन के बाद 1 हफ्ते तक पीरियड खाली रहते थे, मगर अब कुछ दिनों से बीएड ट्रेनी टीचर ही कभी-कभी क्लास लेने आ जाते हैं, वो सही पढ़ाते हैं या गलत, कोई चेक करने वाला नहीं है।
जेबीटी की प्रोमोशन के बाद टीजीटी की कुछ पोस्टें भर दी जाएंगी। स्कूलों से टीजीटी की डिमांड मांगी गई है। जहां टीचर्स की कमी होगी, वहां दूसरे स्कूलों से टीचर्स भेजे जाएंगे।
-उपकार सिंह, डीपीआई स्कूल्स
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