चंडीगढ़. वेतन की मांग के लिए प्रदर्शन करने वाले एसएसए (सर्व शिक्षा अभियान), रमसा (राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान) और सीएसएस (सेंट्रल स्पोंसर्ड स्कीम) के अध्यापकों को जेल भेजने के मामले में पंजाब मानवाधिकार आयोग ने कड़ा नोटिस लिया।
आयोग ने राज्य के गृह विभाग को नोटिस जारी कर एसएसपी बठिंडा से 4 जुलाई तक रिपोर्ट लेकर जवाब देने को कहा है। आयोग ने विभाग के प्रमुख सचिव डीएस बैंस को कहा कि वे ऐसे मामलों को गंभीरता से लें। गौरलतब है कि 84 अध्यापकों को सरकार ने जेल भेज दिया था।
आयोग ने कहा कि अपने हक की मांग करने वालों को सरकार की ओर से जेल भेजना मानवीय अधिकारों का उल्लंघन है। ये अध्यापक अपना वेतन मांग रहे थे न कि कोई अपराध कर रहे थे। इसलिए इन्हें तुरंत रिहा किया जाए।
बस में भरकर ले जाया गया कोर्ट
बठिंडा. फरीदकोट जेल में बंद 75 शिक्षकों को बठिंडा के एडिशनल सिविल जज जसबीर कौर की अदालत में पेश किया गया। सभी को बस में भरकर कोर्ट ले जाया गया। इनमें महिलाएं भी शामिल थीं। मंगलवार को कोर्ट ने मामले की अगली पेशी 28 मई को तय की है।
कोर्ट परिसर से बाहर निकलते ही शिक्षकों ने ने प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इन सभी शिक्षकों की यूनियन के प्रदेश प्रधान दीदार सिंह ने कहा, ‘हम सिर्फ सरकार पैनल से मीटिंग चाहते हैं। मंत्री पैनल में बैठकर यूनियन की बात तो सुन सकते हैं, मगर मीटिंग करने की बजाय सरकार ने हमें जेल में बंद कर दिया है।’
अध्यापकों को रिहा करो : जाखड़
चंडीगढ़. नेता प्रतिपक्ष सुनील जाखड़ ने फरीदकोट जेल में बंद अध्यापकों जिनमें 40 महिलाएं हैं, को मुख्यमंत्री से शीघ्र रिहा करने की मांग की अपील है। उन्होंने कहा कि अपना हक मांगने वालों को सरकार जेल भेज रही है, जबकि सरेआम लोगों के कत्ल करने वाले खुले घूम रहे हैं।
शिक्षकों का कसूर इतना है कि वे 13 महीनों से बकाया वेतन लेने के लिए बठिंडा में प्रदर्शन कर रहे थे। लोकतंत्र में अपने हकों के लिए प्रदर्शन करने का सभी को अधिकार है। उन्होंने कहा कि अकाली-भाजपा सरकार ने महिला टीचरों को भी नहीं बख्शा और उन्हें भी जेल में डाल दिया।
ऐसे पहुंचे थे जेल
512 अध्यापकों को 13 माह से वेतन नहीं मिला है। एसएस अध्यापकों ने एसएसए, रमसा और सीएसएस यूनियन के बैनर तले एक मई को बठिंडा में प्रदर्शन किया था। इस दौरान उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। 5 मई को जेल से सदस्यों की रिहाई को लेकर प्रदर्शन करने वाले अन्य शिक्षकों को भी जेल भेज दिया गया। 84 शिक्षकों में 25 महिलाओ को जले भेजा था। इनमें से 9 ने जमानत ले ली थी।