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  • The Case Of Anupama's Parents File A Written Complaint

'देरी नहीं, ऑपरेशन न करने का था सारा मामला'

9 वर्ष पहले
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चंडीगढ़. छात्रा अनुपमा के मामले में बुधवार को स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन में पीजीआई और अनुपमा के पेरेंट्स के वकील पंकज चांदगोठिया की ओर से लिखित बहस दायर की गई। जस्टिस श्याम सुंदर की कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई के लिए ५ मार्च की तारीख तय की है। इस तारीख पर सुनवाई पूरी करते हुए मामले पर फैसले को सुरक्षित रखा जा सकता है।

एडवोकेट चांदगोठिया ने कहा कि अनुपमा की लगी चोटों के इलाज के लिए पहले दिन ही ऑपरेशन हो जाना चाहिए था। लेकिन पीजीआई ने यह ऑपरेशन नहीं किया, जिससे अनुपमा के शरीर में गैंगरीन फैल गया। इससे इलाज के लिए ऑपरेशन की जगह उसकी टांग काटने के लिए ऑपरेशन करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि यह मामला ऑपरेशन में देरी का नहीं बल्कि ऑपरेशन न करने का है। जिससे इलाज में कोताही साफ जाहिर होती है। वहीं पीजीआई की ओर से कहा गया कि जांच कमेटी की फाइंडिंग से कमीशन बाध्य नहीं है। कमीशन को फैसला खुद करना चाहिए न कि जांच रिपोर्ट के आधार पर। इस पर एडवोकेट चांदगोठिया ने कहा कि इंक्वायरी एक्सपर्ट डॉक्टरों की कमेटी ने की है। कमीशन का फैसला एक्सपर्ट रिपोर्ट पर ही आधारित हो सकता है। इस केस में पीजीआई को अनुपमा के परिजनों को मुआवजा देना चाहिए।

ऑपरेशन तय था, पर पीजीआई ने किया नहीं
केस हिस्ट्री: 17 जुलाई २०१२ को सीटीयू की बस से कुचले जाने से छात्रा अनुपमा घायल हो गई थी, उसे पीजीआई में लाया गया। उसका ऑपरेशन होना तय हो गया था। इसलिए उसे प्री-ऑपरेटिव रिकवरी में रखा गया था। ताकि जल्द से जल्द ऑपरेशन किया जा सके। लेकिन बाद में उसका ऑपरेशन टलता गया। 19 जुलाई की रात उसे ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। लेकिन ब्लड प्रेशर डाउन होने के चलते ऑपरेशन टल गया। अगले दिन 20 जुलाई की रात उसे फिर ऑपरेशन थियेटर ले जाया गया जहां गैंगरीन के चलते उसकी एक टांग को काट दिया गया। उसके बाद अनुपमा को ऑपरेशन टेबल पर ही दिल का दौरा पड़ा। फिर रिवाइव करने की कोशिश की गई। लेकिन 24 जुलाई को उसकी मौत हो गई।