चंडीगढ़। देश भर में बुधवार से वेब बेस्ड टैक्सी सर्विस बंद हो जाएंगी। दिल्ली में ऊबर कैब्स के ड्राइवर ने रविवार को एक युवती से रेप किया था। इसके बाद होम मिनिस्ट्री ने मंगलवार को ये आदेश जारी कर दिए। एडिशनल सेक्रेटरी एसटीए राजीव तिवारी ने बताया कि चंडीगढ़ में इसका असर ऊबर, मेरू, ओला और टैक्सी फॉर श्योर कैब्स पर पड़ेगा। इनकी करीब 200 कैब्स शहर में हैं, जो बंद हो जाएंगी।
मेगा कैब, आरबीटीएस और फैब कैब की 200 रेडियो टैक्सी ही चलेंगी। मिनिस्ट्री के आदेश के बाद प्रशासन ने शहर में चल रही रेडियो टैक्सी कंपनियों का रिकॉर्ड मांगा। मेगा कैब, आरबीटीएस और फैब को दो दिन में सभी ड्राइवरों की पुलिस वेरीफिकेशन और कैरेक्टर सर्टिफिकेट जमा कराने को कहा गया है। डीसी मोहम्मद शाईन ने सीआरपीसी धारा 144 के तहत आदेश जारी किए हैं कि जब तक कैब ऑपरेटर ड्राइवर की पुलिस वेरिफिकेशन कराकर रिपोर्ट हासिल नहीं करते, तब तक किसी कैब को चलने की इजाजत नहीं होगी। कोई बगैर वेरिफिकेशन पकड़ा गया तो ड्राइवर व कैब कंपनी मालिक पर भी केस होगा।
जो चलेंगी उनमें क्या सेफ्टी है
मेगा कैब्स लगा है ब्लैक बॉक्स
मेगा कैब के जनरल मैनेजर अरविंद के अनुसार उनकी हर टैक्सी में ब्लैक बॉक्स लगा है, जिसमें
मोबाइल डाटा ट्रांसफर सिस्टम है। ये ऑफ होते ही अलार्म बज उठेगा और गाड़ी की तलाश शुरू हो जाएगी। हेल्पलाइन नंबर 9876301234
आरबीटीएस गाड़ियों की ट्रेकिंग
आरबीटीएस के प्रवक्ता ने बताया कि उनकी कंपनी की अपनी गाड़ियां हंै और ड्राइवर भी परमानेंट हैं। सभी की पुलिस वेरीफिकेशन है। कंपनी उन्हीं को ड्राइवर रखती है जिनके पास लोकल लाइसेंस है। हर गाड़ी में जीपीआरएस सिस्टम लगा है, जिससे ट्रेकिंग रहती है। हेल्पलाइन नंबर 8288048604 8288048603
फैब कैब लेडीज का लेते हैं
फैब कैब के मैनेजर अमन ठाकुर के अनुसार उनकी हर गाड़ी में ट्रेकिंग सिस्टम लगा हुआ है। कंपनी की गाड़ियां अपनी है। यही नहीं किसी भी लेडीज कस्टमर के मामले में वह उनके अपनी जगह पर पहुंचने के बाद उनका फीडबैक लेते हंै। सभी ड्राइवरों का पुलिस वेरीफिकेशन करवाया हुआ है। हेल्पलाइन नंबर 0172-4242424
क्या है वेब बेस्ड कंपनियां?
वह कंपनियां, जिनमें कैब्स मोबाइल एप्प से बुक होती है। बुकिंग के वक्त ये गाड़ियां मोबाइल पर नजर आती हैं।
इनमें क्या खतरा है?
न गाड़ियां अपनी हैं, न ही ड्राइवर। सब आउटसोर्सिंग पर। कोई शिकायत लोकल लेवल पर दर्ज नहीं होगी। एक बार फोन ऑफ हुआ तो गाड़ी को ट्रैक करना मुश्किल।
और जो वेब बेस्ड नहीं हैं वो...?
इनमें गाड़ी की लगातार ट्रैकिंग की जाती है। कंट्रोल रूम में मॉनिटर पर लोकेशन पता रहती है, सिर्फ मोबाइल पर सिस्टम नहीं टिका है।
एक साथ 200 टैक्सी कम होने का असर?
शुरुआती दिनों में कैब बुकिंग में दिक्कत आ सकती है या कैब के लिए ज्यादा देर इंतजार भी करना पड़ सकता है।
रेट बढ़ेंगे क्या?
नहीं। शहर में एसटीए के पास रजिस्टर्ड कोई भी रेडियो टैक्सी कंपनी अपनी मर्जी से रेट नहीं बढ़ा सकती। नए रेट की मंजूरी एसटीए से लेनी होती है।