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पीयू में \'वॉयलेंस अगेंस्ट वुमन\' का भी सब्जेक्ट, यूजीसी के भी निर्देश

7 वर्ष पहले
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चंडीगढ़. सेक्सुअल हैरासमेंट, जेंडर सेंसेटाइजेशन और वॉयलेंस अगेंस्ट वुमन संबंधित सब्जेक्ट अब पंजाब यूनिवर्सिटी के कैंपस और इसके कॉलेजों में पढ़ाया जाएगा। इसका सिलेबस तैयार करने के लिए पीयू ने कमेटी का गठन कर दिया है। एक जनहित याचिका पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से पंजाब सरकार को दिए गए निर्देशों पर यह सब्जेक्ट शुरू किया जा रहा है।

पंजाब यूनिवर्सिटी के अलावा पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला, जीएनडीयू अमृतसर व पंजाब की अन्य सभी यूनिवर्सिटीज को यह निर्देश दिए गए हैं।

यूजीसी के भी निर्देश

इससे पहले दिल्ली में निर्भया केस के करीब एक महीने बाद यूजीसी ने गाइडलाइंस जारी की थीं कि देश की सभी यूनिवर्सिटीज जेंडर सेंसेटाइजेशन पर काम शुरू करें। लेकिन यह काम एक साल बाद शुरू हुआ, वह भी हाईकोर्ट के निर्देश पर। कोर्ट ने गाइडलाइंस दी हैं कि वॉयलेंस अगेंस्ट वुमन को करिकुलम का हिस्सा बनाओ। इसमें बताया जाए कि वॉयलेंस है क्या और इससे संबंधित कानून कौन से हैं। इसे कॉलेज एजुकेशन का हिस्सा बनाया जाए। जेंडर सेंसेटाइजेशन पर सेमिनार एवं जागरूकता अभियान चलाए जाएं। स्कूल-कॉलेजों में ट्रांसपोर्टेशन का क्या इंतजाम है, यह जानकारी भी कोर्ट ने मांगी है।

कमेटी तय करेगी सिलेबस

पीयू ने इसके लिए प्रो. राजेश गिल, प्रो. निष्ठा जायसवाल और सेंटर फॉर वुमन स्टडीज एंड डेवलपमेंट की चेयरमैन की कमेटी का गठन किया है। कमेटी ही यह तय करेगी कि इसे सिलेबस का हिस्सा कैसे बनाया जाए। उसके बाद इसे पीयू कैंपस के अलावा कॉलेजों को भी भेजा जाएगा। उल्लेखनीय है कि हाल ही में पीयू के सर्वे में भी साबित हुआ है कि महिलाओं को कानूनों की जानकारी नहीं है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट किसी महिला के रंग-रूप या रहन-सहन को लेकर ताने देने को भी हिंसा करार दे चुकी है।

हमने इस कोर्स कंटेंट पर काम के लिए कमेटी का गठन कर दिया है। इस कमेटी की सिफारिशों के बाद ही अगली कार्रवाई होगी। उम्मीद है कि अगले सेशन से इसे करिकुलम में शामिल कर लिया जाएगा। प्रो. एके भंडारी, रजिस्ट्रार, पीयू