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अरुणाचल में कांग्रेस को फिर झटका: CM खांडू समेत 45 MLAs ने PPA ज्वाइन की

अरुणाचल में पहले प्रेसिडेंट रूल था। जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने नबाम तुकी सरकार को बहाल किया था।

Dainik Bhaskar

Sep 16, 2016, 01:39 PM IST
गुरुवार को अरुणाचल असेंबली मे गुरुवार को अरुणाचल असेंबली मे
ईटानगर/नई दिल्ली. अरुणाचल प्रदेश में 10 महीने में कांग्रेस को दूसरी बार झटका लगा है। सीएम पेमा खांडू समेत कांग्रेस के 43 विधायक पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (PPA) में शामिल हो गए हैं। इससे पहले दिसंबर में दिवंगत कलिखो पुल ने कांग्रेस से बगावत कर बीजेपी के साथ सरकार बनाई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस सरकार को इस साल जुलाई में हटा दिया था। बता दें कि 36 साल में देश में ऐसा दूसरी बार हुआ है जब किसी मौजूदा सीएम ने लगभग सभी विधायकों के साथ पार्टी बदल ली है। कांग्रेस में चले गए थे भजनलाल...
- 22 जनवरी 1980 को हरियाणा के सीएस भजनलाल रातों रात पूरी सरकार के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए थे।
- केंद्र में इंदिरा गांधी की सरकार बनने के बाद उन्होंने जनता पार्टी के शासन वाली कई राज्यों की सरकार को बर्खास्त कर दिया था।
- इससे बचने के लिए वे जनता पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे।
अब क्या होगा?
- संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप के मुताबिक अगर सरकार के साथ बहुमत है तो फिर इसे साबित करने की जरूरत नहीं है।
- हालांकि, कोई भी सदस्य नो कॉन्फिडेंस मोशन लाता है या राज्यपाल खुद चाहें तो सरकार को बहुमत साबित करने के लिए कहा जा सकता है।
NEDA ने कहा सरकार को समर्थन देंगे
- अरुणाचल असेंबली में ताजा उठापटक के बाद नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक एलायंस (NEDA) कन्वीनर हेमंता विश्व सरमा ने सरकार को बाहर से समर्थन देने का भरोसा दिलाया है।
- उन्होंने कहा, ‘PPA के साथ आने के बाद पेमा खांडू नेचरली NEDA के मेंबर हो गए हैं, लिहाजा वह हमारे मुख्यमंत्री में से एक हैं।’
BJP के एलायंस का हिस्सा रहा है PPA
- PPA का गठन 1979 में हुआ था। यह 10 रीजनल पार्टी के एलायंस (NEDA) का हिस्सा है।
- NEDA का गठन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने मई 2016 में किया था। अभी बीजेपी के नेता हेमंता विश्व सरमा NEDA के कन्वीनर हैं।
अभी विधानसभा की क्या स्थिति है?
- अरुणाचल असेंबली में कुल 60 सीटें हैं। 2014 में हुए इलेक्शन में कांग्रेस के 42, पीपीए के 5, बीजेपी के 11 और 2 निर्दलीय विधायक थे।
- जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने जब कलिखो पुल को हटाकर नबाम तुकी की सरकार को बहाल किया था, तब पीपीए के पांच विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए थे। और कांग्रेस के पास 47 विधायक हो गए थे।
- अरुणाचल प्रदेश के 28 दिन तक सीएम रहे कलिखो पुल (47) की अगस्त में मौत हो गई। इससे उनकी सीट खाली हो गई। इसके अलावा, कांग्रेस के दो और विधायकों ने सितंबर 2015 में इस्तीफा दे दिया था। इस तरह कांग्रेस के पास 44 विधायक बचे थे। इनमेंं से 43 विधायक पीपीए के साथ चले गए हैं।
कांग्रेस के पास सिर्फ एक विधायक बचा
- इस बड़े उलटफेर के बाद कांग्रेस में सिर्फ नबाम तुकी ही बचे हैं। इन्होंने पीपीए में शामिल होने से मना कर दिया।
पेमा खांडू ​जुलाई में बने थे सीएम
- पेमा खांडू ने जुलाई में ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार बनाई थी। उन्हें नबाम तुकी की जगह सीएम बनाया गया था।
- सुप्रीम कोर्ट ने 28 दिन की कलिखो पुल सरकार को हटा दिया था।
- उस समय कांग्रेस के खाते में दो निर्दलीय विधायकों के साथ 49 विधायक थे।
दिसंबर से राज्य में जारी है उठापटक
- अरुणाचल प्रदेश में पिछले साल दिसंबर से राजनीतिक उठापटक चल रही है। दिसंबर में कांग्रेस सरकार के 42 में से 21 विधायक बागी हो गए थे।
- 16-17 दिसंबर को कांग्रेस के कुछ विधायकों ने बीजेपी के साथ मिलकर सीएम नबाम तुकी के खिलाफ नो कॉन्फिडेंस मोशन पेश किया था। इसमें तुकी की हार हुई।
- कांग्रेस सरकार असेंबली भंग करने के मूड में नहीं थी और जोड़-तोड़ की तमाम कोशिशें करने में लगी हुई थी।
- 26 जनवरी, 2016 को राज्य में प्रेसिडेंट रूल लगा दिया गया।
- 19 फरवरी, 2016 को कांग्रेस के बागी कलिखो पुल ने अरुणाचल के सीएम के रूप में शपथ ली।
- कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में प्रेसिडेंट रूल के खिलाफ पिटीशन लगाई।
- 13 जुलाई, 2016 सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल के गवर्नर के फैसले को गलत ठहराया और कलिखो पुल की सरकार को हटा दिया।
- 14 जुलाई को नबाम तुकी ने फिर से कार्यभार संभाल लिया। लेकिन कांग्रेस के कई विधायक तुकी की लीडरशिप में सरकार बनाने के पक्ष में नहीं थे।
- तब पेमा खांडू को विधायक दल का नेता चुना गया।
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