पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • एनजीटी ने डीडीए आर्ट ऑफ लिविंग को जारी किया नोटिस

एनजीटी ने डीडीए आर्ट ऑफ लिविंग को जारी किया नोटिस

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
विश्व सांस्कृतिक महोत्सव का उद्घाटन करेंगे पीएम मोदी और समापन में पहुंचेंगे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

सबसे बड़े कार्यक्रम के रूप में आयोजित करने की है योजना

35 हजार से ज्यादा कलाकार लेंगे हिस्सा, 40 से ज्यादा वाद्य बजाए जाएंगे

भास्करन्यूज | नई दिल्ली

आर्टऑफ लिविंग द्वारा यमुना खादर में 11 से 13 मार्च तक होने वाले विश्व सांस्कृतिक महोत्सव का उद्घाटन करने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आएंगे, जबकि समापन समारोह में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी हिस्सा लेंगे। संस्था के 35 साल पूरा होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में 155 देशों के 35 लाख लोगों के शामिल होने की उम्मीद की जा रही है। यमुना खादर में इसके लिए करीब एक हजार एकड़ जमीन पर एक हजार से अधिक लोग दिन-रात तैयारी में जुटे हैं।

गुरुवार को इस महोत्सव की जानकारी देते हुए संस्था के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर ने बताया कि यह विश्व का अब तक का सबसे बड़ा सांस्कृतिक समारोह होगा। यह संसार में सबसे विशाल अस्थायी मंच के रूप में गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में शामिल होने का एक प्रयास होगा। उन्होंने बताया कि तीन दिन के समारोह के दौरान विभिन्न धर्मों की केवल शीर्ष हस्तियां बल्कि अनेक देशों के राजनेता, विज्ञानी, खिलाड़ी, सिने कलाकार और आर्थिक जानकार हिस्सा लेंगे। 12 13 मार्च को ग्लोबल लीडरशिप फोरम का आयोजन होगा। 12-13 मार्च की सुबह आम लोगों के योग-ध्यान प्राणायाम का शिविर भी आयोजित होगा।

वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल 2016 के आधिकारिक घोषणा करते श्रीश्री रविशंकर साथ में फेस्टिवल ऑर्गेनाइजिंग कमेटी के चेयरमैन कॉमोडोर राव अन्य (बाएं)। यमुना में चल रही तैयारी (दाएं)।

एनजीटी की नोटिस पर श्रीश्री रविशंकर ने भास्कर के अनिरुद्ध शर्मा को कुछ यूं दिए जवाब:-

भास्कर : क्याइस कार्यक्रम से पर्यावरण को नुकसान नहीं होगा और यमुना में प्रदूषण नहीं बढ़ेगा?

श्रीश्री: हमपर्यावरण को लेकर बेहद सजग हैं। इस बात की रत्तीभर संभावना नहीं है कि हम यमुना में जरा भी प्रदूषण बढ़ाएं। यह बात हमारे एजेंडे में सबसे ऊपर है। लाखों लोग एंजाइम बनाकर ला रहे हैं, इसे 17 गंदे नालों में बहाया जाएगा। नालों के पानी को शुद्ध करने के लिए हम यह तकनीक ला रहे हैं। इससे अन्य लोगों में भी पर्यावरण के प्रति सजगता आएगी। हम लगातार नदियों के पुनर्जीवन में जुटे हैं। महाराष्ट्र में 11, कर्नाटक में 4 और तमिलनाडु में हमने एक नदी को पुनर्जीवित किया है जिन्हें लोगों ने भुला दिया था। हम यह भरोसा दिलाना चाहते हैं कि प्रदूषण नहीं होने देंगे बल्कि यमुना इससे भी शुद्धता पवित्रता से रहे, उसकी जिम्मेदारी लेते हैं।

भास्कर: क्याएंजाइम वैज्ञानिक परीक्षण कर लिया गया है? यह असरकारी होगा?

श्रीश्री: इसेविज्ञानियों के सुझाव से ही तैयार किया गया है और विज्ञानी ही इसे अंजाम भी देंगे। उम्मीद है कि इसका असर भी दिखना चाहिए।

भास्कर: स्टेजवगैरह बनाने के लिए और अस्थाई ढांचा खड़ा करने के लिए यहां सैकड़ों ट्रक मलबे की डंपिंग की जा रही है जोकि एनजीटी के आदेश के तहत प्रतिबंधित है?

श्रीश्री: यहगलत सूचना है, हमने कहीं से मलबा लाकर नहीं डाला है। वहां 25 एकड़ जमीन पर पहले से काफी मलबा पड़ा हुआ था, हमारे पास उसकी फोटो है। हम उसे हटाए जा रहे हैं। जिस मंच पर 40 वाद्यों के 8 हजार से अधिक वादक कलाकार, दक्षिण अफ्रीका के 650 से अधिक ड्रमर सहित करीब 35 हजार कलाकार नर्तक अपनी प्रस्तुति देने वाले हों, उसके लिए काफी बड़े स्टेज की जरूरत थी। इतने बड़े पैमाने पर दुनिया में कहीं भी ऐसा आयोजन नहीं हुआ।

भास्कर: लेकिनइतना बड़ा आयोजन होने के बाद क्या स्थिति जस की तस रह सकेगी?

श्रीश्री: गंगाके किनारे सदियों से कुंभ का आयोजन होता रहा है तो क्या इससे गंगा सूख गई। यमुना किनारे बहुत से आयोजन होते रहे हैं। यमुना को और शुद्ध करेंगे, वैज्ञानिक जैसा बताएंगे वैसे पेड़ लगाएंगे। कोई भी मलबा-कचरा वहां रहने नहीं देंगे। 2008 में हमने मेरी दिल्ली मेरी यमुना का आयोजन करके करीब 500 टन कचरा यमुना से निकाला था। क्या ऐसा करने वाले यमुना को सूखने देंगे।

भास्कर: पर्यावरणविद्यमुना किनारे को समारोह स्थल चुने जाने का विरोध कर रहे हैं। यमुना को ही क्यों चुना गया, दिल्ली में कोई अन्य स्थान क्यों नहीं?

श्रीश्री: पहलीबात की यमुना नदी के प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित हो। दूसरी बात इतनी बड़ी जगह दिल्ली में कहीं उपलब्ध नहीं थी। और तीसरी बात यह स्थान दिल्ली के किसी भी इलाकों से यहां का आवागमन आसान है। कुछ बातें आसुरी शक्तियों की तरह होती हैं, इनका सामना करना है, इसके लिए मानवता का बल होना चाहिए।

भास्कर: इससमारोह का मुख्य मकसद क्या है?

श्रीश्री: आजलोग दुनिया की तमाम बुराइयों से भयभीत हैं, उनके जीवन में खालीपन है, अवसाद है। एेसे माहौल में इन्हें दूर करने के लिए संगीत, ज्ञान, ध्यान-योग ही एक माध्यम है जो मानवता को ऊपर उठा सकता है। अच्छे लोगों का साथ आना ही एक पर्याप्त संदेश है कि हम बुराइयों पर काबू पा सकते हैं।

यमुना खादर में डाला गया कई ट्रक मलबा

विश्व सांस्कृतिक महोत्सव की चल रही तैयारी

आईआईटी, दिल्ली के प्रो. एके गोसाईं को प्रस्तावित स्थल की सर्वे रिपोर्ट एक हफ्ते में सौंपने के आदेश

खबरें और भी हैं...