10 साल ऑपरेशनल अभियान में रहे
Â13 साल की कुल सेवा में हनुमनथप्पा ने 10 साल मुश्किलभरी चोटियों पर गुजारे।
Âथप्पा जम्मू कश्मीर के मेहोर में में 2003 से 2006 तक तैनात रहे। यहां उन्होंने आतंकवाद विरोधी दस्ते में शामिल रहे
Âवे नार्थ ईस्ट में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दीं। 2010 से 2012 के बीच उग्रवादी संगठन एनडीबीएफ और यूएलएफए के खिलाफ सैन्य ऑपरेशन में शामिल रहे।
पाक ने कहा, सुलझना चाहिए यह मुद्दा
मुश्किलों से जूझना पसंद था, इसलिए चुनौती वाली जगहों पर ही पोस्टिंग ली
गांव में दुख भी, गर्व भी
लांसनायकहनुमनथप्पा की मौत से पूरा देश स्तब्ध है। सोशल मीडिया पर लोग इस योद्धा को अपने तरीके से श्रद्धाजंलि दे रहे हैं। इस बीच एक वरिष्ठ अफसर ने बताया कि 13 साल के सैन्य करियर में उसने 10 साल जोखिम भरे इलाके ही चुने। जी-जान से वहां पर देश की रक्षा की। इसबीच पाकिस्तान की तरफ से सियाचिन में आपसी सहमति से सेना के जवानों को हटाने और मुद्दो को तुरंत सुलझाने के लिए पहल की गई है। इससे पहले 2005 में तत्कालीन पीएम डॉ. मनमोहन सिंह ने सियाचिन ग्लैशियर का दौरा किया था।
मनमोहन सिंह भारत के ऐसे पहले पीएम थे, जो सियाचिन पहुंचे थे। उन्होंने दौरे के बाद सियाचिन को ‘पीस माउंटेन’ में तब्दील करने की बात कही थी। तबसे सियाचिन से सैनिकों को हटाने का जिक्र शुरू हुआ था। सियाचिन को दुनिया के सबसे खतरनाक जंगी स्थानों में से एक माना जाता है। भारत-पाकिस्तान के बीच सियाचिन लेकर तीन दशक से विवाद की स्थिति है। 74 किलोमीटर लंबे इस ग्लैशियर पर अपना नियंत्रण बनाए रखने के लिए भारत ने यहां 10 हजार से ज्यादा सैनिकों को तैनात कर रखा है। एक अनुमान के मुताबिक यहां सेना की तैनाती में भारत को हर दिन करीब 7 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
इस बीच पाकिस्तान ने कहा कि सियाचिन से आपसी सहमति से जवानों को हटाकर उसके और भारत के बीच सियाचिन मुद्दे का ‘तत्काल’ समाधान निकालने का समय गया है। ताकि यह सुनिश्चित हो कि ग्लैशियर पर विषम परिस्थितियों के कारण और जवानों की जानें जाएं। पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने इस संबंध में पिछले साल संयुक्त राष्ट्र महासभा में पीएम नवाज शरीफ के प्रस्ताव का जिक्र किया। बासित ने कहा, ‘ये हादसे बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण तरीकों से जल्दी इस मसले के समाधान की जरूरत पर बल देते हैं।’
बहादुरी -जीवटता को याद रखेगा देश
हनुमनथप्पाने देश की सेवा के लिए अपनी जिंदगी का त्याग कर दिया है। राष्ट्र उसकी ये कुर्बानी हमेशा याद रखेगा। उसकी बहादुरी और जीवटता को। -प्रणबमुखर्जी, राष्ट्रपति
सोशल मीडिया पर भी हर कोई दे रहा है इस बहादुर जवान को श्रद्धाजंलि