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ये तो कोई रिश्ता ही नहीं है घरेलू हिंसा कैसे मानें : कोर्ट

5 वर्ष पहले
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नई दिल्ली | पतिके खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला लेकर मुआवजे के लिए कोर्ट पहुंची महिला को कोर्ट ने राहत देने से मना कर दिया। जज ने कहा, ‘आप दोनों में शादी जैसा तो कोई रिश्ता ही नहीं बनता तो घरेलू हिंसा कैसे मानें।’

असल में दोनों पहले से शादी-शुदा थे। लेकिन महिला ने पूर्व पति और पुरुष ने प|ी से तलाक लिए बिना ही दूसरी शादी कर ली। इस पर कोर्ट ने कहा, ‘जब तक पहली शादी का अस्तित्व है, तब तक दूसरी शादी जायज नहीं है।’ इस के साथ ही महिला की याचिका खारिज कर दी। इसमें उसने दूसरे पति के खिलाफ याचिका दायर कर घरेलू हिंसा के मामले में मुआवजा, गुजारे भत्ता और राहत की मांग की गई थी। मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट शिवानी चौहान ने कहा, ‘दोनों ही पक्ष एक-दूसरे के साथ वैध विवाह के लिए अयोग्य हैं।







इसलिए मामला घरेलू हिंसा कानून-2005 के दायरे में नहीं आता।’

कोर्ट की दलील

अगरआपने पहले पति या प|ी को कानूनी तौर पर तलाक नहीं दिया है तो आप जिंदगी भर किसी दूसरे व्यक्ति से वैध रूप से विवाह बंधन में नहीं बंध सकते। इस मामले में पहला वैध विवाह विच्छेद नहीं हुआ है। यह दलील नहीं मानी जा सकती कि दोनों पक्षों ने पिछले विवाह की जानकारी होने के बावजूद विवाह किया था। इसलिए यह मान्य माना जाना चाहिए।

पहले पति और ससुराल वालों ने बाहर निकाल दिया था

महिलाने दलील दी कि उसकी पहली शादी 1994 में हुई थी। उसके पहले पति और ससुराल वालों ने घर से बाहर निकाल दिया था। उसके बाद उसने दूसरी शादी की। दूसरा पति उसे और उसके पहले पति को जानता था। वह भी दूसरे पति की पहली प|ी को जानती थी। यह जानते हुए भी दोनों ने सभी रस्में निभाते हुए बाकायदा शादी की। इसलिए अगर गलती है तो दोनों की है। इसलिए वह दूसरे पति से मुआवजे अन्य रियायतों की हकदार है।

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