नहीं मिला प्रवेश तो धरने पर बैठीं हेल्पलाइन 181 में कार्यरत महिलाएं
तीन सालों में 17 लाख महिलाओं ने दर्ज कराई शिकायत, आर्थिक संकट से गुजर रहा हेल्पलाइन
भास्करन्यूज | नई दिल्ली
पिछलेचार सालों में लगभग 17 लाख महिलाओं की शिकायतें दर्ज करने वाली हेल्पलाइन नंबर 181 अपनी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। बुधवार को हेल्पलाइन नंबर 181 में कार्यरत महिला कर्मचारियों को बुधवार को दिल्ली सचिवालय में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई, जिसकी वजह से हेल्पलाइन की कंसलटेंट इंचार्ज सहित 18 महिलाकर्मी दिल्ली सचिवालय के बाहर गेट पर बैठ गईं। पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के शासन काल में शुरू की गई 181 हेल्पलाइन में कार्यरत महिलाकर्मी बुधवार सुबह से ही दिल्ली सचिवालय के गेट पर बैठी हैं। दिन की शिफ्ट में कार्य करने वाली महिलाएं जब ड्यूटी के लिए गेट पर आईं तो उन्हें प्रवेश नहीं करने दिया गया। ऐसे में नाराज सभी महिलाकर्मी अपनेकंसलटेंट इंचार्ज खादिजा फारूखी के नेतृत्व में दिल्ली सचिवालय के गेट नंबर छह पर धरने पर बैठ गईं। इन महिलाकर्मियों के धरने पर बैठने की वजह से सचिवालय का गेट भी बंद कर दिया गया और सचिवालय में दिनभर आने-जाने के लिए अन्य मार्ग का उपयोग किया गया।
महिलाकर्मियों की दलील
हेल्पलाइनकी कंसल्टेंट इंचार्ज खादिजा फारूखी का कहना है कि पिछले साल भर से हेल्पलाइन नंबर आर्थिक संकट से गुजर रही है। हर दो से तीन महीने के दौरान वेतन राेक दिया जाता है। कंप्यूटर खराब हैं, हेडफोन भी पुराने हो चुके हैं, जिसकी वजह से कानों में समस्या होती है। बार-बार आवाज उठाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। गाड़ी के ड्राईवर का वेतन पिछले 8 महीने से नहीं मिला, जिसकी वजह से 4 फरवरी को गाड़ी बंद हो गई। इसी तरह एक और महिलाकर्मी गीता ने बताया कि आज सुबह जह वह ड्यूटी पर आई तो उसे प्रवेश पर रोक लगा दी गई।