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भूमि अधिग्रहण विधेयक के बजाए केंद्र सरकार बनाएगी पट्टा कानून

5 वर्ष पहले
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छत्तीसगढ़सहित देश के दर्जन भर से अधिक भाजपा शासित राज्यों का समर्थन जुटाने के बाद अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार भूमि अधिग्रहण विधेयक की बजाए भूमि पट्टा कानून बना सकती है।

इस कानून के बनने से किसान अपनी जमीन खेती के लिए दूसरे किसान या बटाईदार को बेझिझक दे सकेंगे। इसके लिए छत्तीसगढ़ के अलावा गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गोवा, दमन-दीव दादरा नगर हवेली जैसे राज्यों ने अपनी सहमति दे दी है। दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी की भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन करने की मंशा सफल नहीं हो पाई माना जा रहा है कि इसीलिए मोदी सरकार ने 2013 के कानून में संशोधन करने वाला अध्यादेश समाप्त होने दिया। क्योंकि, इस अध्यादेश को पारित कराने के लिए विपक्ष तैयार नहीं हुआ। अब मोदी सरकार किसानों की कृषि योग्य भी भूमि को पट्टा पर बटाई पर देने को आसान बनाने के लिए एक मॉडल कानून बनाने की तैयार कर रही है। इस दिशा में विधेयक तैयार करने से पहले सरकार सभी राज्यों से सहमति लेना चाहती है क्योंकि मॉडल कानून बनाने के लिए राज्यों की हामी जरूरी है। इसके लिए नीति आयोग ने हाल में ही एक बैठक करके छत्तीसगढ़ सहित लगभग दर्जन भर से अधिक राज्यों की मंशा जानी। इस दौरान राज्यों ने मॉडल कानून बनाने की आवश्यकता महसूस की और समर्थन किया। बिल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुसार नीति आयोग ने कृषि विशेषज्ञ डा. टी हक की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया था। डा. हक ने बताया कि जमीन पट्टा पर देने को कानूनी रूप दिए जाने पर किसान, बटाईदारों और देश को फायदा होगा। अभी बहुत से किसान भय से खेती पट्टा पर नहीं देते। यदि वे पट्टा पर देंगे तो उत्पादकता बढ़ेगी और देश को फायदा होगा।

कानून से दूसरे किसान या बटाईदार को अपनी जमीन दे सकेंगे किसान

प्रस्तावित भूमि पट्टा कानून में किसानों को अपनी जमीन किराये पर देने के लिए प्रोत्साहित करना और बदले में उन्हें जमीन की सुरक्षा की गारंटी देने प्रावधान है। पट्टेदारी में अभी की किसान या जमीदार अपनी खेती देते हैं लेकिन उनमें भय बना रहता है कि कहीं जमीन पर कोई कब्जा कर ले।

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