दवाओं पर कस्टम ड्यूटी छूट समाप्त करने पर पुनर्विचार
जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों में संभावित वृद्धि से आशंकित केंद्र सरकार 74 दवाओं पर कस्टम ड्यूटी छूट को पुन: बहाल करने पर विचार कर रही है।
उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड ने एक अधिसूचना जारी कर 74 दवाओं पर कस्टम ड्यूटी छूट समाप्त कर दी थी। केंद्र सरकार के इस फैसले की चौतरफा आलोचना हुई थी। दवा उद्योग से जुड़े लोगों का कहना था कि कस्टम ड्यूटी छूट समाप्त करने के फैसले से कैंसर और डायबिटीज की जैसी दवाएं 22 से 35 फीसदी तक महंगी हो जाएगी, क्योंकि छूट समाप्त होने से इन दवाओं पर 22 फीसदी सीमा शुल्क लगेगा।स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक जीवन रक्षक दवाएं महंगी होने की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार दवाओं पर कस्टम ड्यूटी छूट को पुन: बहाल करने पर विचार कर रही है।
उधर, सस्ती दवा के लिए काम करने वाली संस्था मेडिसिन सैंस फ्रंटियर्स की वकील लीना मेंघानी के मुताबिक जिन लोगों को बीमारी के लिए विदेशी दवाइयों की जरूरत पड़ती है, वे सरकार के फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। जैसे हीमोफीलिया की दवा फैक्टर-8 या फैक्टर-9 भारत में कम बनती है। इसके बीमार आयातित दवा पर निर्भर रहते हैं।
मुंबई| वित्तमंत्री अरुण जेटली अगर बीमा नियामक इरडा की सलाह मानते हैं तो इंश्योरेंस प्रीमियम पर सर्विस टैक्स बंद हो सकता है। इरडा ने इसकी सिफारिश की है। इसकी दलील है कि दूसरे वित्तीय प्रोडक्ट में सर्विस टैक्स नहीं देना पड़ता है। इसलिए बीमा प्रीमियम पर भी नहीं लगना चाहिए। इरडा सदस्य नीलेश साठे ने पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी दी। साठे ने बताया कि इरडा ने एनपीएस की तरह जीवन बीमा कंपनियों की पेशन योजनाओं पर टैक्स छूट की भी मांग की है। इससे बीमा कंपनियों को लाभ होगा। पिछले बजट में नेशनल पेंशन सिस्टम में 50,000 निवेश करने पर अतिरिक्त टैक्स छूट का प्रावधान किया गया था।