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काम पर नहीं लौटे सफाई कर्मचारी

5 वर्ष पहले
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अस्थाई कर्मचारियों को हटाने और संपत्ति कर बढ़ाने से किया इनकार

कर्मचारियों को निकालने के लिए निगमों पर दबाव बना रही है सरकार: उपाध्याय

सरकार का दलित विरोधी चेहरा आया सामने, केजरीवाल को सालाना उत्सव मनाने का कोई अधिकार नहीं

भास्करन्यूज | नई दिल्ली

प्रदेशभाजपा ने मंगलवार को दिल्ली सरकार पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार का असली चेहरा सामने गया है। उसे एक साल पूरा होने पर जश्न मनाने का कोई अधिकार नहीं बचा है।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने सांसद रमेश बिधूड़ी, उत्तरी निगम महापौर रविन्द्र गुप्ता, सदन के नेता योगेन्द्र चांदोलिया और मीडिया प्रभारी प्रवीण शंकर कपूर के साथ पत्रकार वार्ता में कहा कि दिल्ली सरकार जनता का विश्वास तेजी से खो रही है। जनविरोधी कार्यों के साथ-साथ आकंठ भ्रष्टाचार में डूबी है। दिल्ली सरकार वरिष्ठ आईएएस शंकुतला गैमलीन, धर्मपाल, अश्वनी कुमार, मुकेश कुमार मीणा, कुलदीप गैंगर(दानिक्स) सभी दलित अधिकारियों को प्रताड़ित कर ठिकाने लगाने के बाद अब निगमों में अनुबंध पर काम कर रहे लगभग 75 हजार दलित कर्मचारियों को निकालने के लिए निगमों पर लोन देने के बदले दबाव डाल रही है।

उपाध्याय ने कहा कि चुनाव पूर्व अस्थायी सरकारी कर्मचारियों विशेषकर सफाई कर्मचारियों को आम आदमी पार्टी ने स्थायी करने का वायदा किया था। पर सत्ता में आने के बाद सभी अस्थायी सफाई कर्मियों एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को सरकारी सेवा से हटाने पर आमादा है। पत्रकारों के समक्ष दिल्ली सरकार द्वारा नगर निगमों के लिए जारी एक परिपत्र को रखते हुए उपाध्याय ने कहा कि 4 फरवरी, 2016 को नगर निगमों को भेजा केजरीवाल सरकार का परिपत्र उसके बाल्मीकि-दलित समाजों एवं गरीब विरोधी चेहरे का प्रमाण है। इसके बाद भी आप के नेता खुद को दलितों के हितैषी और मसीहा घोषित कर रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि केजरीवाल सरकार दिल्ली में सफाई, माली, चपरासी जैसे कामों में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को ठेकेदारी व्यवस्था के अंतर्गत लाकर उनके अधिकार को छीनना चाहती है। उत्तरी दिल्ली नगर निगम में सदन के नेता योगेन्द्र चांदोलिया ने कहा कि कांग्रेस एवं आम आदमी पार्टी दोनों एक सिक्के के दो पहलू हैं जो गरीब और दलित को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं। नगर निगम में कांग्रेस शासन के दौरान या दिल्ली जल बोर्ड में कांग्रेस शासन और अब केजरीवाल सरकार के दौरान सफाई कर्मियों को नियमित करने के लिए कभी कोई काम तब तक नहीं किया गया जब तक कर्मचारी आंदोलन के रास्ते पर आये हों। पर भाजपा शासन के दौरान हमनें 2011-12 में नगर निगम में 7200 से अधिक कर्मचारियों को स्वतः संज्ञान लेकर नियमित किया था।

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