मैनेजमेंट कोटा पर कोर्ट का फैसला सुरक्षित
{निजी स्कूलों की दलील, सरकार का आदेश एलजी के आदेश का उल्लंघन
{दिल्ली में अच्छी स्कूलों की कमी से लोगों को मजबूरी में जाना पड़ रहा है नोएडा: कोर्ट
भास्करन्यूज | नई दिल्ली
दिल्लीसरकार ने बुधवार को हाई कोर्ट में कहा कि निजी स्कूलों में नर्सरी में प्रवेश के लिए मैनेजमेंट कोटा में अंतर्निहित रूप से ही दुरुपयोग की आशंका थी जिसकी वजह से सरकार को हस्तक्षेप कर इसे रद्द करना पड़ा।
मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायमूर्ति जयंतनाथ की पीठ के एक प्रश्न पर यह तर्क दिया गया। पीठ ने पूछा था कि निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को मैनेजमेंट कोटा का इस्तेमाल करने से कैसे रोका जा सकता है जबकि उन्हें उपराज्यपाल के 2007 के एक आदेश के तहत इसका अधिकार है।
दिल्ली सरकार ने इस मुद्दे पर कहा, जब अंतनिर्हित रूप से दुरुपयोग की आशंका है तो नियामक के तौर पर राज्य कह सकता है कि ऐसा मत कीजिए। मैनेजमेंट कोटा एक मानदंड है जिसके दुरुपयोग की आशंका होती है।
दूसरी तरफ निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों ने दलील दी कि मैनेजमेंट कोटा और कई मानकों को रद्द करने का दिल्ली सरकार का छह जनवरी का आदेश उपराज्यपाल की ओर से जारी नहीं किया गया या किसी कानून के तहत जारी नहीं किया गया और उपराज्यपाल के 2007 के आदेश का उल्लंघन है।
दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद पीठ ने सरकार की अर्जी पर अपना फैसला सुरक्षित रखा। सरकार ने उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती दी थी जिसमें अदालत ने निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में नर्सरी में प्रवेश के लिए मैनेजमेंट कोटा और अन्य कुछ मानदंडों को समाप्त करने पर रोक लगाई थी। अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा कि दिल्ली में अच्छे स्कूलों की कमी की वजह से लोगों को नोएडा जाने पर मजबूर होना पड़ रहा है जहां दाखिला मिलना आसान है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि सरकार को दिखाना होगा कि निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूल मैनेजमेंट कोटा के माध्यम से व्यावसायीकरण और लाभ कमाने में शामिल हैं। अदालत ने कहा, इस तरह के आरोपों के लिए आधार क्या है?
सरकार ने कहा कि उसे कई अभिभावकों से शिकायत मिली हैं कि कुछ स्कूलों ने कैपीटेशन शुल्क की मांग की है। इन्हें एकल न्यायाधीश के सामने रखा गया जिन्होंने सरकार को इस पर कार्रवाई का निर्देश दिया।