एजेंसी। नई दिल्ली
एजेंसी। नई दिल्ली
कीमतोंमें और तेजी नहीं आए इसके लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) और राजस्व अन्वेषण महानिदेशालय (डीआरआई) जैसी सुरक्षा एजेंसियों को खासकर तुअर, उड़द और चना दाल पर कड़ी निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है। इसका मकसद दालों में सट्टेबाजी और कीमतों में कृत्रिम तेजी काे रोकना है।
पैदावार में कमी से पिछले एक वर्ष से दालों की कीमतों में तेजी का रुख बना हुआ है। पिछले वर्ष खुदरा में दालों के भाव 200 रुपए किलो तक पहुंच गए थे।
हालांकि बाद में सरकारी एजेंसियों की ओर से कालाबाजारियों पर कार्रवाई के चलते दालों की कीमतें घटकर 160 रुपए तक रह गई। सरकार की ओर कई कदम उठाने के बावजूद इस साल भी दालों की कीमतों में तेजी का बरकरार है।