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स्निफर डॉग जहां अड़कर बैठा, वहीं 35 फीट बर्फ में दबे थे हनुमंत, एयर बबल के सहारे 6 दिन तक लेते रहे सांस
सियाचिन ग्लेशियर में सोमवार रात बचाव दल ने लांस नायक हनुमनथप्पा को करीब 35 फुट बर्फ के नीचे से जीवित निकाल लिया। बचाव दल को ऑपरेशन के छठे दिन यह कामयाबी मिली। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे किसी का बचना चमत्कार ही है। हनुमनथप्पा कर्नाटक के धारवाड़ िजले के रहने वाले हैं। उन्हें दिल्ली के आर्मी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अभी वे कोमा में हैं। डॉक्टरों के मुताबिक अगले 48 घंटे अहम हैं। तीन फरवरी को हुई बर्फबारी में मद्रास रेजीमेंट के 10 जवान दब गए थे। पांच के शव पहले मिल गए थे। चार शव मंगलवार को निकाले गए। उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा ने बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा हो गया है।
हनुमनथप्पा की मां, प|ी और एक साल का बच्चा।
मां ने कहा- बेटे ने सपने में आकर बाेला था कि लौटकर जरूर आऊंगा
हनुमनथप्पाके जिंदा होने की खबर पर परिवार का हर कोई खुशी से रो पड़ा। मां बोली- ‘बेटा मेरे सपने में आया था। बोला कि लौटकर आऊंगा। लो गया।’ पिता से पूछा गया कि उम्मीद थी इस दिन की? तो बाेले- ‘उसका नाम ही हनुमनथप्पा है। उसे कौन मार सकता है।’ प|ी ने कहा आधी रात को टीवी से पता चला कि वो जिंदा हैं। यह मेरे लिए पुनर्जन्म जैसा है।
लांस नायक हनुमनथप्पा