मकान बनाने में देरी तो बिल्डर चुकाएगा हर्जाना
नई दिल्ली | दिल्लीकी एक अदालत ने कहा है कि बिल्डर कोई पवित्र गाय नहीं है, जिससे ग्राहक सवाल नहीं पूछ सकते। बिल्डर किसी भी ग्राहक से ऐसा चार्ज वसूल नहीं कर सकता, जिसका जिक्र करार में नहीं है। यदि संपत्ति को ग्राहक को सौंपने में देरी हुई है तो बिल्डर को इसका हर्जाना चुकाना होगा।
अदालत ने कहा कि बिल्डर अपनी अवैध कमाई के लिए कई हथकंडे अपनाते हैं। ग्राहकों से पैसा निकालने के लिए लागत के बढ़ने या अतिरिक्त शुल्क लगाते हैं। लेकिन वे ऐसा नहीं कर सकते। अतिरिक्त जिला जज कामिनी लाउ ने रियल एस्टेट कंपनी टीडीआई इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के खिलाफ यह फैसला सुनाया। साथ ही उसे निर्देश दिए कि वह सोनीपत के प्रोजेक्ट के प्लॉट का कब्जा उसे बुक करने वाले दो भाइयों को दें। मध्य दिल्ली में रहने वाले राजेश और मनोज मित्तल ने जनवरी 2006 में सोनीपत में टीडीआई सिटी में प्लॉट बुक किया था। उनसे बिल्डर ने 42.7 लाख रुपए देने को कहा। इनमें से वे 38.8 लाख रुपए उसे दे चुके हैं।
करार में जिक्र नहीं है तो बिल्डर नहीं वसूल सकता कोई शुल्क