चीन सागर में अमेरिका के साथ भारतीय गश्त
बराक ओबामा जब पिछले वर्ष नई दिल्ली आए थे, तब भारत और अमेरिका ने कहा था कि दक्षिण चीन सागर में नौवहन की स्वतंत्रता का वे समर्थन करते हैं। उसी समय अमेरिकी राष्ट्रपति और भारतीय प्रधानमंत्री के बीच उन खास क्षेत्रों की पहचान करने पर भी सहमति बनी थी, जिनमें दोनों देश समुद्री सहयोग बढ़ा सकते हैं। अब खबर है कि दक्षिण चीन सागर में साझा गश्त लगाने पर भारत और अमेरिका विचार कर रहे हैं। यह दूरगामी परिणामों वाली पहल है। यह समुद्री इलाका विवादास्पद है। चीन का उस पर दावा है, लेकिन दक्षिण-पूर्वी एशिया के कई देश इसे स्वीकार नहीं करते। वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई, फिलीपीन्स और ताईवान का भी दक्षिण चीन सागर के कुछ क्षेत्रों पर अपना-अपना दावा है। ऐसे में जब चीन ने वहां कृत्रिम द्वीप बनाने की योजना बनाई, तो उन देशों से उसका तनाव बढ़ गया। उनमें से अधिकांश देश अमेरिका के क्षेत्रीय सहयोगी हैं। इस बीच वियतनाम के साथ भारत के संबंधों में भी प्रगाढ़ता आई है। वियतनाम ने दक्षिण चीन सागर में तेल की खोज में भारत से सहयोग मांगा है। चीन को यह बात पसंद नहीं आई थी। अब उस क्षेत्र में अमेरिका के साथ साझा गश्त की योजना पर उसका भड़कना लाजिमी है। दक्षिण चीन सागर व्यापार का महत्वपूर्ण मार्ग है। अनुमान है कि हर साल उस रास्ते से पांच खरब डॉलर से अधिक का मालवहन होता है। यानी यहां मुद्दा महज क्षेत्रीय संप्रभुता का नहीं है, बल्कि उसका आर्थिक पहलू भी है। हालांकि, अभी ब्योरा सामने नहीं है, मगर अनुमान है कि संयुक्त गश्त हिंद महासागर से लेकर दक्षिण चीन सागर तक में लगाई जाएगी। भारतीय नौ सेना पर अधिकांशतः हिंद महासागर में निगरानी का दायित्व होगा। इस सिलसिले में काबिल-ए-जिक्र है कि पिछले महीने अमेरिकी नौ सेना का एक बेड़ा दक्षिण चीन सागर में 12 किलोमीटर अंदर एक विवादित द्वीप तक पहुंच गया था। तब चीन ने अमेरिका पर नौवहन की स्वतंत्रता के नाम पर समुद्री आधिपत्य कायम करने की कोशिश का आरोप लगाया था। अब मुमकिन है कि उसकी आलोचनाओं के निशाने पर भारत भी आए, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के तहत भारतीय विदेश नीति ने जो मोड़ लिया है, अमेरिका के साथ बनी ताजा सहमति उसका तार्किक परिणाम है। ऐसे में समझा जा सकता है कि भारत सरकार को चीन की प्रतिक्रिया का पहले से अंदाजा होगा और उसने इसका उचित उत्तर देने की तैयारी भी जरूर की होगी।