प्रोफेसर अली का जांच में दावा, गिलानी ने दी गलत जानकारी
जेएनयू मामले की जांच के लिए पुलिस सक्षम : बीएस बस्सी
कहा, एनआईए को जांच के लिए लिखा गया खत प्रक्रिया का हिस्सा
भास्करन्यूज | नई दिल्ली
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में देश विरोधी नारे लगाने के मामले को एनआईए (नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी) को स्थानांतरित किए जाने के मसले पर पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी का कहना है कि दिल्ली पुलिस इस मामले की जांच करने के लिए सक्षम है। दिल्ली पुलिस ने एनआईए से कभी नहीं कहा कि वह इस मामले की जांच करे। इस बाबत एनआईए को लिखा गया खत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) का हिस्सा है। एसओपी का पालन करते हुए दक्षिण जिला पुलिस उपायुक्त ने पुलिस आयुक्त काे खत लिखा है। साथ आयुक्त कार्यालय से यह खत एनआईए को भेजा गया है।
पुलिस आयुक्त ने बताया कि एसओपी के तहत जब भी कोई एफआईआर भारतीय दंड संहिता की धारा 124 (देशद्रोह) के तहत दर्ज की जाती है तो उसकी जानकारी भारत सरकार के जरिए नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी को देनी होती है। यह प्रावधान एनआईए एक्ट में भी उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि इस मामले की जांच एनआईए अपने हाथ में लेती है तो दिल्ली पुलिस को कोई दिक्कत नहीं है। यदि एनआईए इस केस की जांच नहीं करती है तो दिल्ली पुलिस इस केस की जांच करती रहेगी।
पुलिस आयुक्त ने कहा है कि जेएनयू प्रकरण में आतंकी संबंधों की जांच अभी जारी है। इस मामले में कोई आतंकी लिंक मिला तो इसकी जानकारी दी जाएगी।
सबूतों को लेकर अटका मामला
सबूतोंके अभाव में पुलिस इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पा रही है। पुलिस प्रेस क्लब में आयोजन के दौरान हुई देश विरोधी नारेबाजी की मोबाइल फोन रिकार्डिंग एकत्रित करने का प्रयास कर रही है। लेकिन अभी तक कोई भी शख्स सामने नहीं आया है। पुलिस ने प्रेस क्लब से सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को अपने कब्जे में ले लिया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि पर्याप्त सबूत एकत्रित करने के बाद इस मामले में आरोपी लोगों को केवल सम्मन करेगी बल्कि जांच के लिए उनके हिरासत की मांग भी करेगी।
‘जरूरत हुई तभी होगी आरोपी छात्रों की गिरफ्तारी’
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में देश विरोधी और संविधान विरोधी नारे लगाने वाले छात्रों को पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी ने आश्वासन दिया है कि मामले में आरोपी छात्र यथाशीघ्र पुलिस जांच में शामिल हों। उनकी गिरफ्तारी तब तक नहीं की जाएगी जब तक उनकी गिरफ्तारी जरूरी नहीं होगी। पुलिस जांच से भागना से किसी का कोई मकसद पूरा नहीं होगा। ऐसा करने से उनका मामला पुलिस के समक्ष कमजोर होगा। उन्होंने बताया कि अभी तक इस मामले में छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी की गई है। जांच के दौरान कुछ देश विरोधी और संविधान विरोधी नारे लगाने वाली छात्रों के समूह में शामिल कुछ छात्रों की पहचान कर ली गई है। फिलहाल वह गिरफ्तारी के डर से पुलिस से बच रहे हैं। पुलिस जल्द ही इन लोगों को जांच में शामिल करेगी।जेएनयू में पुलिस जांच पर प्रश्न चिन्ह लगाने वालों से पुलिस आयुक्त ने कहा है कि लोगों को इस मामले में कोई शंका करने की आवश्यकता नहीं है। इस मामले को मेरिट के आधार पर दर्ज किया गया है। जेएनयू परिसर में नौ फरवरी को जो कुछ भी हुआ वह आईपीसी की धारा 124ए (देश द्रोह) के अंतर्गत आता है। लिहाजा संविधान और कानून के प्रावधानों के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज अपनी तफ्तीश शुरू की है। प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर छात्र संघ अध्यक्ष की गिरफ्तारी की गई है। उन्होंने सलाह दी है कि इस मामले में आरोपी अन्य छात्र पुलिस जांच में सहयोग करें। अपनी सलाह के साथ उन्होंने भरोसा भी दिया है कि आरोपी छात्रों की तब तक गिरफ्तारी नहीं की जाएगी जब तक गिरफ्तारी जरूरी नहीं होगी। पुलिस इस मामले की गंभीरता के साथ सभी पहलुओं पर जांच कर रही है।