अदालत ने केंद्र, एलजी से मांगा जवाब
दिल्लीहाईकोर्ट ने उस जनहित याचिका पर शुक्रवार को केंद्र और दिल्ली के उप राज्यपाल से जवाब मांगा जिसमें आरोप लगाया गया है कि सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण नियम लागू करने की बजाय सड़क पर वाहनों की संख्या कम करने के लिए स्वयं को जानबूझकर गुमराह किया।
मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायमूर्ति जयंत नाथ की पीठ ने गृह मंत्रालय और उपराज्यपाल को नोटिस जारी किया और उनसे उस जनहित याचिका पर 30 मार्च तक जवाब मांगा जिसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि दिल्ली में वाहन जनित वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी 1988 मोटर वाहन कानून के गैर प्रवर्तन एवं गैर कार्यान्वयन के चलते हुई है। यह कानून प्रदूषण फैलाना वाला वाहन चलाने के लिए सजा एवं जुर्माने का प्रावधान करता है।
एनजीओ कैम्पेन फार पीपुल पार्टिसिपेशन इन डेवलपिंग प्लानिंग की ओर से दायर याचिका में दावा किया गया है कि जांच केंद्रों पर किया जाने वाला प्रदूषण जांच एक दिखावा है और प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) प्रमाणपत्र सरकार एवं उसकी एजेंसियों की जानकारी में ऐसे ही जारी किया जा रहा है। अधिवक्ता अनिल अग्रवाल के जरिये दायर याचिका में कहा गया है, वाहनों की जांच करने और उल्लंघन करने वाले वाहनों को सड़क पर चलने से रोकने की बजाय प्रतिवादियों ने सड़क पर वाहनों की संख्या कम करने के लिए स्वयं को भ्रमित किया तथा ऑड-ईवेन नंबर की गाड़ियों के सड़क पर चलने पर एक दिन बीच करके रोक लगायी।