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जेएनयू संविधान विरोधी गतिविधियों का मंच नहीं हो सकता : कुलपति

5 वर्ष पहले
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जेएनयूप्रशासन ने अफजल गुरु के कार्यक्रम के विरोध में जारी प्रदर्शनों के मद्देनजर परिसर में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक लगाते हुए गुरुवार को कहा कि विश्वविद्यालय संविधान विरोधी गतिविधियों का मंच नहीं हो सकता। नवनियुक्त कुलपति जगदीश कुमार ने कहा, जेएनयू समुदाय परिसर में मुक्त चर्चा के अधिकार का समर्थन करता है, विश्वविद्यालय इसका इस्तेमाल ऐसी गतिविधियों के लिए करने की कड़ी निंदा करता है जो संविधान एवं देश के कानूनों का उल्लंघन करती है। यद्यपि अपवाद हो सकते हैं जब हाशिये पर रहने वाले वर्ग स्वतंत्रता का दुरुपयोग करते हैं।

उच्चस्तरीयजांच समिति का किया गठन

उन्होंनेकहा, विश्वविद्यालय नौ फरवरी की शाम को परिसर में हुई घटना को गंभीरता से लेता है। मामले की जांच और जरूरी उचित कार्रवाई करने के लिए एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया गया है। कुलपति ने छात्रों से अपील की कि वे इस घटना से उपर उठें और परिसर को सामान्य स्थिति में लौटाने के लिए मदद करें। उन्होंने कहा, इस मामले में समस्या का अलग से समाधान किया जाएगा, विश्वविद्यालय शैक्षिक माहौल और उस जीवंत चर्चा के लिए परिवेश के संरक्षण के कदम उठाएगा जो जेएनयू ने हमेशा ही मुहैया कराया है और जिसका वह समर्थन करता है। विश्वविद्यालय में प्रदर्शन आज तीसरे दिन भी जारी रहा। छात्रों ने इस मामले में विश्वविद्यालय के हस्तक्षेप की मांग की जिसमें पुलिस छात्रों को पूछताछ के लिए ले गई है।

जेएनयू प्रशासन ने परिसर में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर लगाई रोक

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