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एप आधारित कैब सेवा पर नीति में कम रहे सरकारी हस्तक्षेप : दिल्ली हाईकोर्ट

5 वर्ष पहले
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रेडियो टैक्सी ने लगाई है याचिका

दिल्लीमें ओला और उबर को बिना लाइसेंस सेवा देने की मंजूरी को लेकर रेडियो टैक्सी ऑपरेटरों ने दिल्ली सरकार के खिलाफ हाइकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि टेक्नोलॉजी के बदलाव के साथ कानून में भी बदलाव होना चाहिए। याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाइकोर्ट ने एक्सपर्ट पैनल का गठन किया था।

15से ज्यादा सुझाव दिए पैनल ने

पैनलने 15 से ज्यादा महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे। इसमें एप आधारित कैब सेवा के लिए कम से कम भाड़ा तय करने और शहरों में दौड़ रही टैक्सियों को बिना अवरोध परमिट देने का सुझाव शामिल है। पैनल में पर्सनल व्हीकल को कमर्शियल व्हीकल में तबदील करने कि प्रक्रिया आसान बनाने का सुझाव भी दिया गया है।

नई दिल्ली | दिल्लीहाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि ओला और उबर जैसी ऐप आधारित कैब सेवा के लिए बन रही नीति में सरकारी हस्तक्षेप कम से कम रहे। सरकारी हस्तक्षेप के बढ़ने से इस उभरते क्षेत्र में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा।

हाईकोर्ट ने इस सर्विस पर एक्सपर्ट पैनल के सुझाव भी स्वीकार कर लिए। पैनल के सुझाव केंद्र सरकार के कानूनी सलाहकार मनीष मोहन और कीर्तिमान सिंह ने पेश किए थे। जस्टिस मनमोहन ने दिल्ली सरकार को कोर्ट द्वारा नियुक्त पैनल द्वारा तैयार ड्राफ्ट पर विचार करने को कहा था। मामले अगली सुनवाई 6 फरवरी को होगी। हाइकोर्ट ने कहा कि सरकार अगर खुले मन से सुझावों पर विचार करेगी तो उपाय खोजने में आसानी रहेगी। इससे पहले दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा कि दिल्ली सरकार सुझाव व्यापक जनहित में कितने उपयोगी है इस आधार पर विचार करने के बाद सुझावों को स्वीकार करेगी। उन्होंने कहा कि यह सेवा देने वाली कंपनी ओला ने रजिस्ट्रेशन की अर्जी दी है और उबर को भी इसका पालन करना चाहिए।

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