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सब जूनि. नेशनल में भी हिस्सा लेती है अरुमुगम के एनजीओ की टीम

Dainik Bhaskar

Nov 13, 2017, 08:55 AM IST

News - 47 की उम्र में वीआरएस लिया, हॉकी को बढ़ावा देने के लिए बनाई ‘वन थाउजेंड हॉकी लेग्स’, दिल्ली के 84 स्कूलों के बच्चों को दे...

सब जूनि. नेशनल में भी हिस्सा लेती है अरुमुगम के एनजीओ की टीम
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47 की उम्र में वीआरएस लिया, हॉकी को बढ़ावा देने के लिए बनाई ‘वन थाउजेंड हॉकी लेग्स’, दिल्ली के 84 स्कूलों के बच्चों को दे रहे हैं ट्रेनिंग

58साल के के. अरुमुगम आईआईटियन हैं। 2006 तक वे वॉटर रिसोर्स मिनिस्ट्री के डिपार्टमेंट में डिप्टी डायरेक्टर थे। फिर वीआरएस ले लिया। अब दिल्ली के सैकड़ों बच्चों के हॉकी के सपने को जी रहे हैं। अरुमुगम हमेशा की तरह जब शनिवार को यूनियन एकेडमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल पहुंचे तो करीब 80 बच्चे उनके इंतजार में थे। अरुमुगम के साथ पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी संदीप सिंह भी थे। संदीप ने बच्चों को हॉकी की ट्रेनिंग देनी शुरू की और अरुमुगम दूर से देखते रहे। दिल्ली में ऐसे छह सेंटर हैं, जहां अरुमुगम की वजह से 84 स्कूल के बच्चे ट्रेनिंग लेने आते हैं। ‘भास्कर’ ने उनसे नौकरी छोड़ हॉकी से जुड़ने की वजह पूछी। उन्होंने जवाब दिया, ‘इसकी शुरुआत 1982 में हुई। उस साल भारत में हॉकी वर्ल्ड कप हुआ था और मैं पहली बार कोई मैच देखने गया था। फिर खेल की खबरें भी पढ़ने लगा। 1990 के दशक में कुछ अखबारों में लिखने भी लगा। 2006 में हॉकी वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए एनओसी नहीं मिला, तो वीआरएस ले लिया। इसके बाद मैंने कुछ किताबें भी लिखीं।’

राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं अरुमुगम

ट्रेनिंग के खर्च के सवाल पर अरुमुगम ने कहा कि एनजीओ का सालाना खर्च करीब 24 लाख रुपए है। करीब 18 लाख रु. का सहयोग वे खुद करते हैं। बाकी दोस्तों और हॉकी प्रशंसकों से जुटाते हैं। नीदरलैंड के गोलकीपर जैट स्टॉक माउन ने 2013 में 60 गोलकीपर किट दिए थे।

वन थाउजेंड हॉकी लेग्स ने दिल्ली में 2010 में 6 हॉकी सेंटर खोले। यहां शनिवार और रविवार को ट्रेनिंग होती है। वॉलंटियरी कोच को पैसे दिए जाते हैं, पर कोई तय फीस नहीं है। हॉकी इंडिया ने 2014 में एनजीओ की टीम को सब जूनि. नेशनल में हिस्सा लेने की अनुमति दी। अगले साल अरुमुगम को आउटस्टैडिंग अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया।

भारतीय हॉकी टीम 2008 में बीजिंग ओलिंपिक के लिए क्वॉलिफाई नहीं कर पाई। इसके बाद अरुमुगम ने सिटीजन ग्रुप ऑफ हॉकी संस्था बनाई। इसी के तहत वन थाउजेंड हॉकी लेग्स प्रोजेक्ट शुरू किया। पहले पुडुचेरी और कोलकाता के स्कूलों में हॉकी स्टिक बांटी गईं। वॉलंटियर रखकर हॉकी का ट्रेनिंग सेंटर शुरू किया।

दिल्ली के हॉकी ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षुओं के साथ के अरुमुगम।

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