पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

सियाचिन: सैनिकों के लिए पाक से बड़ा दुश्मन है मौसम, रोज खर्च होते हैं 7 करोड़

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
नई दिल्ली. दुनिया का सबसे ऊंचा बैटलफील्ड है ‘सियाचिन’। यहां सबसे बड़ी लड़ाई बर्फ से होती है। यही वजह है कि 1984 के पहले तक यहां जवानों को तैनात नहीं किया जाता था। पर अचानक पाकिस्तान यहां कब्जे की कोशिश करने लगा। पहली बार कब हुई आर्मी की तैनाती...
- 1984 में यहां पहली बार हमारी आर्मी की तैनाती हुई।
- इन्फॉर्मेशन मिली थी की पाकिस्तान हाई एल्टीट्यूड पर तैनाती में सोल्जर्स को दिए जानेवाले विशेष कपड़े और गियर खरीद रहा है।
- जिसके बाद इंडियन आर्मी ने ऑपरेशन मेघदूत चलाकर सियाचीन में अपनी सिक्युरिटी मजबूत कर ली।
कब्जा करना चाहता था पाकिस्तान
- पाकिस्तान 17 अप्रैल 1984 को सियाचिन पर कब्जे का ऑपरेशन शुरू करने वाला था।
- 13 अप्रैल 1984 को इंडियन आर्मी का ऑपरेशन मेघदूत पूरा हुआ।
- इससे पहले तक इस इलाके में पर्वतारोही आते थे।
- लेकिन फिर यहां सेना के अलावा किसी के भी आने की मनाही हो गई।
एयरलिफ्ट कर पहुंचाया जाता है 6 हजार टन सामन
- 32 सालों में यहां आर्मी के 882 सोल्जर शहीद हो चुके हैं।
- इनमें से 95 फीसदी की जान जोखिम भरे रास्तों, बर्फ या खराब मौसम ने ली है।
- ग्लेशियर पर हड्डियों को गला देनी वाली ठंड पड़ती है। टेम्परेचर माइनस 55 तक पहुंच जाता है।
- कई बार सोल्जर्स को ऑक्सीजन मास्क के साथ काम करना होता है।
- हर साल 6000 टन सामान एयरलिफ्ट कर यहां पहुंचाया जाता है।
- बर्फ से बने टेम्परेरी हेलिपेड पर चॉपर लैंड करता है।
(माइनस 55 डिग्री में 6 दिन चला रेस्क्यू ऑपरेशन, कैसे जिंदा रहा जवान, यहां क्लिक कर पढ़ें)
क्या है विवाद की वजह

- 1972 के शिमला पैक्ट के वक्त सियाचिन को इंसानों के लायक नहीं समझा गया था।
- लिहाजा दस्तावेजों में सियाचिन में भारत-पाक के बीच सरहद कहां होगी, इसका जिक्र नहीं किया गया।
- तब से पाकिस्तान सियाचिन पर अपना अधिकार जताता आ रहा है।

हमारे लिए क्यों अहम है

- सियाचिन के एक तरफ पाक तो दूसरी तरफ चीन है, इसलिए यह सामरिक नजरिए से अहम है।
- भारत सियाचिन को छोड़ दे तो पाक-चीन की सीमा मिल जाएगी।
- दोनाें का गठजोड़ घातक साबित हो सकता है। सबसे अहम ये कि इतनी ऊंचाई से दोनों देशों पर नजर रखना भी आसान है।
बेहद दुर्गम, बेहद खर्चीला, मौसम सबसे बड़ा दुश्मन
- सर्दियों में सियाचिन में औसतन 1000 सेंटीमीटर बर्फ गिरती है। रात में यहां टेम्परेचर माइनस 55 डिग्री सेल्सियस रहता है।
- ऑक्सीजन का स्तर पर भी यहां कम रहता है। यहां टूथपेस्ट भी जम जाता है। सही ढंग से बोलने में भी काफी मुश्किलें आती हैं।
एक रोटी 200 रुपए की
- हर रोज आर्मी की तैनाती पर 7 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। यानी हर सेकंड 18 हजार रुपए।
- इतनी रकम में एक साल में 4000 सेकंडरी स्कूल बनाए जा सकते हैं
- यदि एक रोटी 2 रुपए की है तो यह सियाचिन तक पहुंचते-पहुंचते 200 रुपए की हो जाती है।
बड़ा जल स्त्रोत
- सियाचिन ग्लेशियर का पानी लद्दाख की नुब्रा नदी का मुख्य सोर्स है।
- दुनिया का सबसे ऊंचा सोनम हेलिपैड 21 हजार फीट पर यहीं है।
- 2009 में हुए एक सर्वे के अनुसार यह ग्लेशियर अब आधा ही रह गया है।
हेलिकॉप्टर से पहुंचाते हैं जरूरी सामान
- सियाचिन पर भारतीय फौज की 150 पोस्ट हैं, जिसके लिए 10 हजार सोल्जर्स तैनात किए गए हैं।
- यहां ज्यादातर सैनिकों की मौत युद्ध नहीं बल्कि एवलांच से हुई है।
- सोल्जर यहां विशेष तरह के इग्लू कपड़ों में रहते है। सैनिक महीने में सिर्फ एक बार नहाते हैं।
- सैनिकों को यहां हाइपोक्सिया और हाई एल्टीट्यूड जैसी बीमारियां हो जाती है।
- वजन घटने लगता है। भूख नहीं लगती, नींद नहीं आने की बीमारी। मेमोरी लॉस का भी खतरा।
- सैनिकाें को यहां रसद पहुंचाने के लिए लगातार हेलिकॉप्टर उड़ान भरते रहते हैं।
- यहां तैनाती पर ऑफिसर्स को हर माह 21 हजार, सोल्जर्स को हर माह 14 हजार अलांउस मिलता है।
- सियाचिन में एक सोल्जर की मैक्सिमम 90 दिन की पोस्टिंग ही होती है।
आगे की स्लाइड्स पर इन्फोग्राफ में पढ़ें सियाचिन के बारे में और इन्फॉर्मेशन...
खबरें और भी हैं...