नई दिल्ली. दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के एक साल के कार्यकाल पर प्रदेश भाजपा ने ‘काला वर्ष’ बताते हुए संसद मार्ग पर धरना दिया। उन्होंने जनता को परेशान करने के लिए केंद्र से दिल्ली सरकार को बर्खास्त करने की मांग की। धरने में प्रस्ताव पारित किया गया कि दिल्ली की जनता केजरीवाल सरकार से तंग आ चुकी है। यदि मौका मिले तो राइट टू रिकॉल का उपयोग कर सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया जाए।
प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने कहा कि आम आदमी का ट्रेडमार्क लेकर जो सत्ता में आये थे वे आम आदमी से किस तरह दूर भागते हैं यह तो जनवरी, 2014 के जनता दरबार में ही स्पष्ट हो गया था। अब हम रोज ऐसे किस्से देखते हैं जहां लोग विरोध दर्ज कराना चाहते हैं। यहां तक कि आत्मदाह करने का प्रयास कर रहे हैं क्योंकि केजरीवाल उनसे मिलते ही नहीं। यह शर्मिंदगी का विषय है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री ऐसे लोगों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं जो राष्ट्रविरोधी नारे लगाते हैं और युवाओं को अतिवाद की राजनीतिक की ओर प्रेरित करते हैं।
जिस शर्मिंदगी के साथ सरकार ने आज समाचार पत्रों में यह दावे किए हैं कि हमनें भ्रष्ट मंत्री को निकाल फेंका, तो हम सरकार से पूछना चाहते हैं कि क्या यह काफी है? हमें याद है कि केजरीवाल साहब कहते थे कि मैं विधानसभा में किसी भी कलंकित व्यक्ति को नहीं बैठने दूंगा। विपक्ष के नेता विजेन्द्र गुप्ता ने केजरीवाल को दिल्ली के विकास के मुद्दों पर असफल होने के लिये खुली बहस की चुनौती दी। उन्होंने मुख्यमंत्री से दिल्ली के हित में टकराव की राजनीति छोड़ने की अपील की है।