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देश के 20 आईआईएम में 14 निदेशकों के पद खाली, ये हैं उनके नाम

5 वर्ष पहले
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नई दिल्ली। इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस बनने की कतार में खड़े देश के सर्वश्रेष्ठ संस्थान में से एक आईआईएम के दो तिहाई संस्थानों में निदेशक के पद खाली पड़े हैं। सोमवार को संसद में आईआईएम निदेशकों की नियुक्ति के संबंध में पूछे गए एक सवाल के जवाब में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री महेंद्र नाथ पांडेय ने लोकसभा में लिखित जवाब में यह जानकारी दी।   

पांडेय के मुताबिक, देश के मौजूदा 20 आईआईएम में से कोलकाता, अहमदाबाद, लखनऊ, इंदौर, शिलांग व काशीपुर को छोड़कर 14 संस्थानों में निदेशक नहीं है। हालांकि मेंटर आईआईएम को सात नए आईआईएम (अमृतसर, सिरमौर, बोधगया, संभलपुर, नागपुर, विशाखापट्नम और जम्मू) के नियमित निदेशक नियुक्त होने तक अतिरिक्त भार दिया गया है। अन्य आईआईएम में पदमुक्त हो रहे निदेशकों के कार्यकाल का विस्तार किया गया है अथवा वहां के वरिष्ठतम प्रोफेसर को निदेशक के पद का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।   

मंत्रालय के मुताबिक, आईआईएम कोझीकोड और जम्मू को छोड़कर अन्य सभी आईआईएम के सर्च एवं सलेक्शन कमेटी ने निदेशक पद के लिए नामों का पैनल सुझा दिया है, जो अभी सरकार के पास विचाराधीन है। कोझीकोड व जम्मू में पद के लिए एडवर्टाइजमेंट किया गया है।   

जिन आईआईएम में निदेशक नहीं है, ये हैं उनके नाम 
बेंगलुरू, कोझीकोड, रोहतक, रांची, रायपुर, उदयपुर, तिरुचिरापल्ली, अमृतसर, सिरमौर, बोध गया, संभलपुर, नागपुर, विशाखापट्टनम और जम्मू। 
 
20 संस्थानों को मिलना है इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस का दर्जा  
बता दें कि हाल ही में केंद्र सरकार ने 20 वर्ल्डक्लास टीचिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूशंस की स्थापना व अपग्रेड का फैसला लिया था। इन संस्थानों को इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस कहा जाएगा। 20 में 10 सरकारी संस्थानों को यह दर्जा मिलना है। ड्राफ्ट गाइडलाइन के मुताबिक, आईआईएम व आईआईटी को इंस्टीट्यूट अॉफ एमिनेंस के लिए आवेदन के योग्य माना जाएगा। नियम व मार्गदर्शन की अधिसूचना जारी होने के बाद इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस के चयन की प्रक्रिया शुरू होगी।  
 
सरकार ने कहा, केंद्रीय विद्यालयों में फीस बढ़ाने का नहीं है कोई प्रस्ताव
सरकार ने आज बताया कि उसके पास केंद्रीय विद्यालयों में छात्रों की फीस वृद्धि करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। लोकसभा में रंजनबेन भट्ट के एक प्रश्न के लिखित उत्तर में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा,  इस समय सरकार के विचारार्थ ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।  मंत्री से पूछा गया था कि क्या सरकार का विचार केंद्रीय विद्यालयों के छात्रों की फीस में वृद्धि करने का है।
 
कुशवाहा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा स्थापित और वित्तपोषित या नियंत्रित अर्ध सरकारी संगठनों, स्वायत्त संगठनों, सांविधिक निकायों आदि के कर्मचारियों के वेतन संशोधन हेतु दिशा निर्देश जारी करते समय सरकार ने अन्य बातों के साथ यह निर्धारित किया है कि स्वायत्त संगठनों से आशा की जाती है कि वे अपने कार्यो का इस ढंग से प्रावधान करें कि अतिरिक्त वित्तीय निहितार्थ को पूरा करने के लिए केंंद्र सरकार पर उनकी निर्भरता कम से कम हो।  
 
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