दुनिया हमें शक की निगाह से देख रही थी, पर जेल के लोग हर हालात में साथ रहे: नूपुर / दुनिया हमें शक की निगाह से देख रही थी, पर जेल के लोग हर हालात में साथ रहे: नूपुर

नूपुर की मां लता चिटनिस के घर सबसे पहले पहुंचा भास्कर, तलवार दंपती के साथ बिताए 30 मिनट।

सुनील मौर्या

Oct 17, 2017, 05:07 AM IST
नूपुर की मां ने आरती उतार और फू नूपुर की मां ने आरती उतार और फू
नाेएडा/ नई दिल्ली. आरुषि-हेमराज मर्डर में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बरी तलवार दंपती सोमवार शाम पांच बजे डासना जेल से रिहा हो गए। डॉ. राजेश तलवार और डॉ. नूपुर तलवार करीब चार साल जेल में रहे। दोनों पुलिस सिक्युरिटी में जेल से जलवायु विहार स्थित नूपुर के माता-पिता के घर पहुंचे। भास्कर वहां सबसे पहले पहुंचा और तलवार दंपती के साथ करीब 30 मिनट बिताए। मां ने आरती उतारी तो गले लगकर फफक पड़ीं नूपुर...
- शाम के 5 बजकर 50 मिनट। नोएडा सेक्टर-25 स्थित जलवायु विहार के एल-245 में रहने वाली नूपुर की मां लता चिटनिस, राजेश तलवार के छोटे भाई डॉ. दिनेश तलवार, उनकी पत्नी वंदना और अन्य परिजन तलवार दंपती का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। सभी खुश थे, लेकिन बेचैन भी।
- ठीक छह बजे राजेश और नूपुर वहां पहुंचे। एक-दूसरे को देख सबकी आंखें नम हो गईं। लता चिटनिस ने आरती उतारी और फूलों से स्वागत कर मिठाई खिलाई। मां के गले लगकर नूपुर फफक पड़ीं। सभी अंदर गए, लंबी चुप्पी थी। किसी को समझ नहीं आया, आखिर बात शुरू करें तो कहां से।
- करीब 15 मिनट बाद मां ने नूपुर से पूछा- कैसी हो? अब परिवार के सभी लोग साथ रहेंगे। कुछ देर बाद नूपुर के साथ डासना जेल में रहीं प्रियंका ने उन्हें गले लगा लिया। दोनों भावुक होकर रो पड़ीं। तभी डॉ. दिनेश तलवार ने कहा- घर के बाहर मीडिया का जमावड़ा लगा है, उनसे कौन बात करेगा? राजेश और नूपुर ने कहा- हम बात करने की हालत में नहीं हैं। दिनेश ने मीडिया से बात कर उन्हें वहां से रवाना कर दिया।
दुनिया के लोग शक की नजरों से देखते हैं, लेकिन जेल के लोग हर हालात में साथ रहे
- इस बीच नूपुर अपनी मां के गले लगकर रो पड़ीं। फिर कहा- चार साल बहुत भारी गुजरे। दिन तो जेल में कट जाते थे पर रात में सिर्फ आरुषि की यादें ही सहारा होती थीं।
- तभी एक रिश्तेदार ने पूछा- अब आगे क्या करना है? तो राजेश बोले- अभी कुछ सोचा नहीं है। पर अब कुछ शांति चाहिए। आरुषि की याद में कुछ करना है।
- जेल की बात निकली तो नूपुर बोलीं कि बाहरी दुनिया के लोग शक की नजरों से देखते हैं, लेकिन जेल के लोग हर हालात में साथ रहे।
- इस बीच डॉ. दिनेश ने कहा कि अब आप आ गए तो अच्छे से दिवाली मनाएंगे। इस पर राजेश बोले- जेल में सब परिवार जैसे हो गए थे, लेकिन हर त्योहार आरुषि याद आती थी। इस बीच लता ने कहा- चलिए कुछ खाते हैं। हमने आपकी पसंद की खीर और मालपुए बनाए हैं।
क्या है पूरा मामला?
- मई 2008 में नोएडा के एक घर में आरुषि और उसके नौकर हेमराज की डेड बॉडी पाई गई थी। गाजियाबाद की स्पेशल सीबीआई कोर्ट इस मामले की सुनवाई की थी। एडिशनल सेशन जज श्यामलाल यादव ने मशहूर डेंटिस्ट राजेश और नूपुर तलवार को परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर दोषी माना था। जस्टिस यादव ने 28 नवंबर 2013 को तलवार दंपती को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
- इस मामले में तलवार दंपती नवंबर 2013 से डासना जेल में बंद थे। 12 अक्टूबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीआई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए तलवार दंपती को बरी कर दिया।
- आदेश सीबीआई कोर्ट तक पहुंचने में वक्त लगने के कारण उन्हें सोमवार तक में जेल रहना पड़ा।
- डॉ. राजेश 3 साल 10 माह और 21 दिन सजायाफ्ता कैदी के तौर पर जेल में रहे। 1 माह 20 दिन विचाराधीन कैदी के तौर पर रहे। कुल करीब 1417 दिन। वहीं, नूपुर 3 साल 6 माह और 22 दिन सजायाफ्ता और 4 माह 26 दिन विचाराधीन कैदी के तौर पर यहां रहीं। दंपती ने जेल में कमाए गए 50 हजार रुपए कैदियों के कल्याण के लिए दान दे दिए हैं।
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नूपुर की मां ने आरती उतार और फूनूपुर की मां ने आरती उतार और फू
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