रिटर्न फाइल करने की अवधि में बदलाव से अटक सकता है पैसा

4 वर्ष पहले
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नई दिल्ली.  जीएसटी रिटर्न फाइल करने की समय-सीमा में बदलाव होने से बड़े कारोबारियों को पैसा जीएसटी नेटवर्क में अटक सकता है। उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलने में दिक्कतें पेश आ सकती हैं। जीएसटी काउंसिल के फैसले के मुताबिक 1.5 करोड़ रुपए तक सालाना टर्नओवर वाले कारोबारियों को अब मासिक की जगह तिमाही रिटर्न दाखिल करना होगा। जबकि इससे अधिक सालाना टर्नओवर वाले कारोबारियों को हर महीने रिटर्न दाखिल करना है।
 
वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि इस बदलाव से 90 फीसदी कारोबारियों को हर महीने रिटर्न दाखिल करने से मुक्ति मिल जाएगी। जीएसटी नेटवर्क का बोझ भी कम होगा।
 
वहीं, दूसरी तरह 1.5 करोड़ रुपए से अधिक सालाना टर्नओवर वाले कारोबारियों का कहना है कि रिटर्न दाखिल करने के नियम में बदलाव से उनकी मुश्किलें बढ़ेंगी। यदि वे 1.5 करोड़ तक सालाना टर्नओवर वाले कारोबारियों को अपना माल बेचते हैं तो उन्हें इनपुट क्रेडिट लेने के लिए उस कारोबारी के रिटर्न फाइल करने तक का इंतजार करना होगा। छोटे कारोबारियों द्वारा हर माह रिटर्न दाखिल नहीं करने से उनके रिटर्न के मिसमैच बना रहेगा और कंप्यूटर एरर बताएगा।
 
दिल्ली के नरेला औद्योगिक इलाके में कास्मेटिक आइटम्स के निर्माता राकेश शर्मा कहते हैं ऐसे में 1.5 करोड़ से अधिक टर्नओवर वाला कारोबारी, इससे कम टर्नओवर वाले कारोबारी के साथ खरीद-बिक्री नहीं करना चाहेगा। क्योंकि इससे उसका रिटर्न प्रभावित होगा और उसे इनपुट क्रेडिट मिलने में दिक्कत होगी।
 
पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट राजीव वालिया कहते हैं, ‘इस प्रकार के कोई भी बदलाव पर स्पष्टीकरण आने में तीन-चार दिन का समय लग जाता है। सरकार की तरफ से नोटिफिकेशन जारी होने पर पूरी बातें साफ हो पाएंगी।’
 
 

 
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