नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट सेवा पर प्रतिबंध लगाने के राज्यों के अधिकार को चुनौती देने वाली अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा, ‘कानून-व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए इस तरह का प्रतिबंध लगाना गलत नहीं है। राज्यों को इसका अधिकार है।’ चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर और जस्टिस आर. भानुमति की बेंच ने गुजरात हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुनवाई करने से इनकार दिया। गौरव सुरेशभाई व्यास ने इस संबंध में विशेष अनुमति याचिका लगाई थी। गुजरात सरकार ने हार्दिक पटेल के नेतृत्व में हुए पाटीदार आंदोलन के दौरान मोबाइल इंटरनेट पर 10 दिन के लिए प्रतिबंध लगाया था। इसे हाईकोर्ट ने सही ठहराया था। इस पर व्यास के वकील अपार गुप्ता ने दलील दी कि सीआरपीसी के तहत इस तरह का प्रतिबंध अनुचित है।
ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए विशेष टेलीग्राफ कानून मौजूद है। इस पर चीफ जस्टिस ठाकुर ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कभी-कभी ऐसा कदम उठाना जरूरी हो जाता है। कानून व्यवस्था की खराब स्थिति से निपटने के लिए समवर्ती अधिकार होने जरूरी हैं।