पुराने नोटों को बंद करने के पीछे है इस शख्स का दिमाग, PM को दिया था प्रपोजल

5 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. मंगलवार की शाम तक देश का माहौल दूसरे दिन की तरह ही सामान्य था। हालांकि, शाम को खबर आई कि एक महत्वपूर्ण मीटिंग के बाद पीएम नरेंद्र मोदी राष्ट्र के नाम संबोधन देंगे। इस एक खबर ने हलचल पैदा कर दी। लोगों को लगा शायद वे कोई बड़ी घोषणा करेंगे। भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के मद्देनजर कयास युद्ध जैसी घोषणा को लेकर भी लगाए गए। पर उन्होंने जो कुछ कहा वह, सबके अनुमान से अलग निकला। उन्होंने 500 और 1000 के पुराने नोटों को बंद करने की घोषणा की। अचानक लिए इस फैसले की हर ओर चर्चा हो रही है। लेकिन बहुत कम लोगों को उस आदमी के बारे में ज्यादा जानकारी होगी, जो पीएम के इस फैसले के पीछे अहम कड़ी है। दावा किया जा रहा है कि वह शख्स कोई और नहीं इंजीनियर अनिल बोकिल हैं। अनिल को मोदी ने दिया था मुलाकात के लिए 9 मिनट का वक्त, मिले तो दो घंटे तक सुनते रहे...
क्योरा पर चर्चा : लोग पूछ रहे हैं कौन हैं अनिल बोकिल ?
- सवाल-जवाब की साइट क्योरा पर अनिल बोकिल को लेकर खूब सवाल किए जा रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर क्यों उनकी चर्चा हो रही है।
- बता दें कि अनिल औरंगाबाद के मेकैनिकल इंजीनियर हैं। वे पुणे की 'अर्थक्रांति संस्थान' के अहम सदस्य हैं, जिसके प्रपोजल पर प्रधानमंत्री ने नोटों को बदलने का फैसला लिया।
- अनिल बेहद साधारण तरीके से रहते हैं। वे औरंगाबाद में कई सफल प्रोजेक्ट कर चुके हैं। सोशियो-इकोनॉमिक डेवलपमेंट पर कई सेमिनारों को संबोधित कर चुके हैं।
- 2014 में लोकसभा चुनाव से पहले अनिल पीएम से मिले थे। उन्हें मुलाकात के लिए सिर्फ 9 मिनट का समय मिला था।
- लेकिन जब करप्शन रोकने और नकली मुद्रा के चलने से बचने के लिए अपना प्रपोजल सुनाने लगे तब दो घंटे तक नरेंद्र मोदी उसे सुनते रहे।
राहुल गांधी ने दिए थे सिर्फ 15 सेकंड
- अनिल बोकिल की टीम कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से भी अपना प्रपोजल लेकर मिली थी।
- रिपोर्ट्स के मुताबिक, तब राहुल ने उन्हें सिर्फ 15 सेकंड का समय दिया था। जिसके बाद वे बीजेपी के पास पहुंचे।
क्या है अर्थक्रांति संस्थान ?
अर्थक्रांति संस्थान एक इकोनॉमिक एडवाइजरी बॉडी है। यह चार्टर्ड अकाउंटेंट और इंजीनियर्स का ग्रुप है। अर्थक्रांति ने जो प्रपोजल पीएम को सौंपा था ब्लैक मनी की रोकथाम, महंगाई, करप्शन, बेरोजगारी और आतंकियों की फंडिंग रोकने में कारगर बताया गया। (संस्थान का पूरा प्रपोजल पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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