नई दिल्ली। आगामी 14 फरवरी से शुरू होने वाले विश्व पुस्तक मेले में इस बार कई रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उम्मीद है कि इस बार मेले में युवाओं की भागीदारी और बढ़ेगी। साल 2014 में आयोजित मेले के दौरान युवाओं ने इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था।
साल 2014 में पुस्तक मेले में आयोजित कार्यक्रम में आईसीसीआर के अध्यक्ष व सांसद डा. कर्ण सिंह ने कहा था - समाज तेजी से बदल रहा है, अब पुस्तकों की बजाए युवाओं के हाथों में इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट नजर आते हैं।
मोबाइल और इंटरनेट के दौर में दुनिया की जानकारी एक क्लिक पर मौजूद हो जाती है। ऐसे में ई-क्लास रूम और ई-बुक्स ने छात्रों को लैपटॉप से जोड़ दिया है। योजना तो हम ही बना रहे हैं, क्योंकि तकनीक में युवा न पिछड़ें, लेकिन ऐसे में किताबों से युवा दूर हो रहे हैं। हालांकि बदले स्वरूप ने युवाओं को नई जानकारियों से भी जोड़ा है। छात्र अब ग्लोबल हो गए हैं।
‘पुस्तकें व आज के युवा विषय’ पर आयोजित चर्चा में बोलते हुए कर्ण सिंह ने कहा था कि कोई भी तकनीक पुस्तकों के सौंदर्य की जगह नहीं ले सकती। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को अधिक से अधिक पुस्तकें पढऩी चाहिए। इस अवसर पर डॉ. कर्ण सिंह की पुस्तक ‘त्रिवेणी’ का लोकापर्ण भी हुआ था, जो निबंध, कविता व उपन्यासों का संग्रह है। मेले में सिने कलाकार नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने ‘रियल्टी इज स्ट्रेंजर देन फिक्शन’ विषय पर दर्शकों से संवाद भी किया।