नई दिल्ली। दिल्ली विश्व पुस्तक मेला इस बार 14 से 23 फरवरी के बीच आयोजित किया जाएगा। किताबों का कुंभ कहे जाने वाले इस विश्व पुस्तक मेले में हर बार की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमियों के आने की उम्मीद है। पुस्तक मेले में इस बार की थीम सूर्योदय : पूर्वोत्तर भारत का उभरता स्वर' रखी गई है।
गौरतलब है कि 2014 में आयोजित 22वें विश्व पुस्तक मेले में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा था कि देश में ज्ञान की भूख के चलते इंटरनेट युग में भी किताबों की अहमियत बनी रहेगी। किताबें पढऩे की आदत हमारी सभ्यता में निहित है। लिहाजा किताबों का स्थान सूचना प्रौद्योगिकी कभी नहीं ले सकती है। इस दौरान मेले के लिए पोलैंड को विशिष्ट मेहमान बनाया गया था।
इस मौके पर राष्ट्रपति ने कहा था कि कोई भी सभ्यता समाज और बच्चों के लिए सार्थक लेखन के बिना विकसित नहीं हो सकता है। इसीलिए रवींद्र नाथ टैगोर और प्रेमचंद सरीखे लेखकों ने बच्चों के लिए लेखन किया है। भारत में जिस तरह प्रकाशन उद्योग का विकास हुआ है, उसे देखकर लगता है कि लोगों में किताबों के लिए रुचि बढ़ी है। नतीजतन ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था से देश की प्रगति भी हुई है।
राष्ट्रपति ने लेखकों, प्रकाशकों एवं सरकार से भी बाल साहित्य को बढ़ावा देने की भी अपील की थी। कार्यक्रम के दौरान पोलैंड की विदेश सचिव कैटरीना कैपरशिचेक, संस्कृति मंत्री (पोलैंड) मोनिका स्पोलेन सहित मशहूर लेखक रस्किन ब्रांड तथा राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष ए सेतु माधवन और निदेशक एमए सिकंदर भी मौजूद थे। पोलैंड की विदेश सचिव कैटरीना कैपरशिचेक ने कहा था कि पोलैंड वासियों के लिए भारत उनका दूसरा घर है। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान भारत ने पोलैंड के ५०० यतीम बच्चों को पनाह दी थी।