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खुद ब्रेल से पढ़ीं, दूसरों के लिए बना रहीं टॉकिंग e-books

6 वर्ष पहले
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नई दिल्ली। संगीता जन्म से दृष्टिहीन हैं। बचपन बेरंग था पर होश संभाला तो बदरंग जिंदगी को बदल देने की ठानी। दिल्ली में रह कर पढ़ीं। एम फिल और पीएचडी की। संगीता आज प्रो. (डॉ.) संगीता अग्रवाल हैं और मुजफ्फरपुर के एलएस कॉलेज में एमए के छात्रों को संस्कृत पढ़ा रही हैं।

संगीता ने ब्रेल लिपि की मदद से पढ़ाई की। अब वे विशेष तकनीक का प्रयोग कर ऐसी ई-बुक्स के निर्माण पर काम कर रहीं हैं, जिससे दृष्टिहीन बच्चे आसानी से पढ़ाई कर सकें। उनके हौसले की उड़ान यहीं तक सीमित नहीं रही। मुजफ्फरपुर में दृष्टिहीन विकलांग बच्चों को पढ़ाने के लिए उन्होंने पिता के फार्म हाउस में शुभम फाउंडेशन नामक स्कूल खोल रखा है। वहां 80 बच्चे पढ़ते हैं। 55 बच्चों को हॉस्टल में रखती हैं, उनके खाने-पीने और कपड़ों की व्यवस्था संगीता खुद करती हैं।

संगीता की कामयाबी की यह कहानी उन सभी के लिए प्रेरणास्पद है जो जीवन में अभावों का रोना रोते हैं और अपनी नाकामी का दोष किस्मत पर मढ़ते हैं। संगीता अब उन तमाम बच्चों के जीवन को शिक्षा की लौ से रौशन करने की कोशिश में हैं, जिससे उनका जीवन सार्थक हो सके। वे नौवीं से बारहवीं तक के छात्रों को बिहार टेक्स्टबुक द्वारा पढ़ाई जाने वाली 62 प्रकार की किताबों को ई-बुक्स में बदल रही हैं। विशेष सॉफ्टवेयर के जरिए वे ‘बोलने वाली किताबें’ तैयार कर रही हैं। बिहार, मध्यप्रदेश की सरकारों ने उनकी ‘किताब’ को अगले साल सिलेबस में शामिल करने का आश्वासन भी दिया है। 27 जनवरी को पटना म्यूजियम में ‘रीडिंग विदाउट सीन’ सेमिनार आयोजित कर संगीता ने इस तकनीक का प्रदर्शन किया, जिसे काफी सराहना मिली।

मोबाइल-कम्प्यूटर में अपलोड होगी यह
किताब मोबाइल, कम्प्यूटर, लैपटॉप, टैब समेत किसी भी इलेक्ट्राॅनिक डिवाइस में आसानी से अपलोड हो सकेगी। दृष्टिहीन छात्र इसे सुनकर आसानी से पढ़ सकेंगे। प्रश्नों के उत्तर भी साथ रहेंगे।

सिलेबस में शामिल की जाएगी

बिहार टेक्स्ट बुक के एमडी दिलीप कुमार ने 1 अप्रैल से इसे लागू करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने शिक्षा विभाग के सचिव श्रीधर चेरूबेलू को इस कार्य को अंजाम तक पहुंचाने का जिम्मा दिया है।

कैसे बनती है यह टॉकिंग ई-बुक

टेक्स्ट बुक को पहले यूनिकोड में टाइप किया जाता है। फिर कम्प्यूटर में एक विशेष प्रकार का सॉफ्टवेयर ‘टॉक्स’ डाला जाता है। इसके जरिए कम्प्यूटर, मोबाइल या अन्य डिवाइस से इसको सुना जा सकता है। बोलने वाली किताब तैयार हो जाने के बाद मार्च 2015 में संगीता मेधावी दृष्टिहीन बच्चों को मोबाइल मुफ्त देंगी।