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डाउनलोड करेंनईदिल्ली। हम आज अपने देश का 65वां गणतंत्र दिवस मना रहे हैं। यह उत्सव क्या हम केवल इसलिए मना रहे हैं क्योंकि 65 वर्ष पूर्व आज ही के दिन हमारा संविधान लागू हुआ था? भारत और विश्व के वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य में इस उत्सव के महत्व को नए परिप्रेक्ष्य में देखना होगा। सर्वप्रथम तो हमें यह जानना होगा कि संविधान लागू नहीं हुआ था बल्कि आज के दिन भारत की जनता ने संविधान को अंगीकृत किया था, आत्म समर्पित किया था। भारत संसदीय प्रणाली वाला एक प्रभुतासम्पन्न, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष लोकतान्त्रिक गणराज्य है।
हमारे इस गौरवशाली गणतंत्र की संविधान में बहुत अनूठी और अद्भुत व्याख्या है। यूरोप के कई देश जैसे इंग्लैंड, स्पेन, स्वीडन, नॉर्वे, डेनमार्क, नीदरलैंड उधर सुदूर पूर्व में मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, जापान आदि प्रजातान्त्रिक (डेमोक्रेटिक) देश तो हैं परन्तु गणतांत्रिक (रिपब्लिकन) नहीं। इधर रूस, चीन, क्यूबा, उत्तरी कोरिया जैसे कई देश हैं जो गणतांत्रिक तो हैं पर प्रजातान्त्रिक नहीं हैं। कितने गौरव की बात है कि हम उस देश के नागरिक हैं जो गणतांत्रिक भी है और प्रजातान्त्रिक भी। अपने देश के संविधान की श्रेष्ठता का ज्ञान तभी होता है जब हम विभिन्न देशों की अलग अलग शासन प्रणालियों का थोड़ा अध्ययन करते हैं। आज गणतंत्र दिवस की यादें ताजा करते हुए हम आपको राजधानी में होने वाली परेड की झलकियां दिखा रहे हैं। इस झलकियों में वो क्षण है जिन्हें देखने पर आपको अपने भारतीय होने पर गर्व महसूस होगा। अद्भुत कलाबाजी और देश के प्रति सच्ची देशभक्ति का प्रतीक देखने के लिए आज के दिन दिल्ली के राजपथ से लालकिले तक परेड निकालकर राष्ट्रपति को 21 तोपो की सलामी दी जाती है। इस मौके पर राष्ट्रपति राष्ट्रीय ध्वज को फहराते हैं।
हम आपको तस्वीरों में गणतंत्र दिवस के वो क्षण दिखा रहे हैं जिन्हें देखने पर आपको अपने भारतीय होने पर गर्व महसूस होगा।
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