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जीएसटी विधेयक संसद के इस सत्र में नहीं होगा पेश
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक संसद के इस सत्र में पेश नहीं होगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली के मुताबिक इसे संसद के अगले सत्र में पेश किया जाएगा। सरकारी सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि जीएसटी से संबंधित ज्यादातर मसलों काे एक हफ्ते के भीतर सुलझा लिए जाने की संभावना है। केंद्र जीएसटी पर जारी गतिरोध दूर करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है।
समझा जा रहा है कि केंद्र राज्यों की मांग मानने पर भी सहमत हो गया है। सूत्रों ने बताया कि पेट्रोलियम उत्पादों और एंट्री टैक्स को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा जा सकता है। यह बात राज्यों के वित्त मंत्रियों और वित्त मंत्री अरुण जेटली के बीच नई दिल्ली में गुरुवार को देर रात तक चली बैठक में यह बात निकलकर सामने आई है। बैठक में एक को छोड़कर बाकी सभी राज्यों ने केंद्र द्वारा जीएसटी पर तैयार किए गए संविधान संशोधन विधेयक के ताजा मसौदे को खारिज कर दिया था। राज्यों को पेट्रोलियम, एंट्री टैक्स और कंपनसेशन के मैकेनिज्म को लेकर आपत्ति जाहिर की थी।
अगले साल विकास दर 6.5% रहने की उम्मीद
वित्तमंत्रीजेटली ने उम्मीद जताई है कि अगले साल देश की विकास दर छह से 6.5% के बीच रह सकती है। और इसके अगले साल यह 7% तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा, कच्चे तेल की कीमतों में कमी आई है। घरेलू स्तर पर महंगाई घट रही है। उन्होंने कहा कि सरकार आर्थिक सुधारों के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसमें बीमा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा बढ़ाना, डीजल को नियंत्रण मुक्त करना, रक्षा क्षेत्र में एफडीआई, श्रम सुधार, विनिवेश, बैंकों में हिस्सेदारी घटाने, जीएसटी लागू करने जैसे सुधार शामिल हैं। वित्तमंत्री ने इससे पहले चालू वित्त वर्ष में विकास दर 5.5 से लेकर 5.9 फीसदी के बीच रहने का उम्मीद जाहिर की थी।