पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • दुनिया को ‘डिजिटल इकोनॉमी’ के खतरे बताएंगे मोदी

दुनिया को ‘डिजिटल इकोनॉमी’ के खतरे बताएंगे मोदी

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
{आस्ट्रेलिया की यात्रा के दौरान काले धन के मुद्दे पर विश्व को भारत के साथ लाने के भी होंगे प्रयास

संतोषठाकुर | नई दिल्ली

वैश्विकनेता बनने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नया कदम ‘डिजिटल इकोनॉमी’ पर जागरूकता कायम करना होगा। ऑस्ट्रेलिया में होने वाले जी-20 सम्मेलन में वे विश्व को बताएंगे कि आखिर क्यों ‘डिजिटल इकोनॉमी’ पर अभी से सतर्क निगाह रखने की जरूरत है। इस सम्मेलन में वे काले धन के मसले पर दुनिया को भारत के साथ लाने का प्रयास भी करेंगे। यही नहीं, वे भारत की अर्थव्यवस्था को गति देने वाले प्रवासी भारतीय कामगारों को वहां से स्वदेश पैसे भेजने में आने वाली समस्या के हल का भी प्रयास करेंगे।

मोदी की 14-18 नवंबर के बीच जी-20,ऑस्ट्रेलिया यात्रा मुख्यत: तीन बिंदुओं पर केंद्रित होगी। इस यात्रा में उनके \\\"शेरपा\\\' और सांसद सुरेश प्रभु ने कहा कि हम चाहते हैं कि दुनिया में टैक्स चोरी पूरी तरह खत्म हो। इसके लिए भारत इस सम्मेलन में वैश्विक स्तर पर बैंकिंग का एक समान प्लेटफार्म स्थापित करने, डिजिटल रूप से डाटा एक-दूसरे को उपलब्ध कराने जैसे मसले उठाएगा। इससे कालाधन या काली कमाई पर प्रभावी अंकुश लगेगा। दूसरा, विदेश से अपने वतन पैसे भेजने में भारतीय दुनिया में सबसे आगे हैं। प्रवासी कामगार करीब 7 बिलियन डॉलर भेजते हैं। लेकिन इसमें एक समस्या यह है कि कई देश वहां से भारत पैसा भेजने की एवज में 10 प्रतिशत तक का कमीशन लेते हैं। हमारा प्रयास है कि इसे 5 प्रतिशत या इससे कम तक लाया जाए। हालांकि, पीएमओ के अधिकारी कहते हैं कि इन दोनों बिंदुओं से अहम तीसरा बिंदु होगा। इस बिंदु को लेकर अगर दुनिया भारत के नजरिए को समझेगी तो केवल इससे विकासशील देशों को लाभ होगा बल्कि वैश्विक कंपनियों की ओर से की जाने वाली टैक्स चोरी भी रुकेगी।

एक अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री इस सम्मेलन के दौरान ‘डिजिटल इकोनॉमी’ को लेकर दुनिया के मुल्कों से बात करेंगे। यह उनके वैश्विक नेता होने के दावे को और बल प्रदान करेगा। अगर ई-कॉमर्स की बात करें तो ऑर्डर एक देश से आता है, माल दूसरे में बनता है और डिलीवरी तीसरे देश के माध्यम से होती है। ऐसे में किस देश को टैक्स मिले, जहां से ग्राहक ने पैसा दिया है, जहां माल बना या फिर जिस देश के माध्यम से डिलीवरी हुई। यही नहीं, कई मामलों मे वैश्विक कंपनियां अलग तरह से टैक्स बच